रक्सौल में मानवता शर्मसार! आदर्शवाद के मंच सजे हैं, मगर इंसानियत एक बंद कमरे में दम तोड़ती रही!
त्वरित टिप्पणी
रक्सौल।(Vor desk)।
एक पूर्व शिक्षिका… एक पूर्व प्राचार्य… दिवंगत नगर पार्षद की पत्नी… और कभी समाज के बीच सम्मान से जीने वाली महिला!
आज वही आभा देवी बदहाल हालत में कमरे में बंद मिलीं। डायल-112 और स्वच्छ रक्सौल की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर अनुमंडल अस्पताल पहुंचाया। इलाज शुरू हुआ, तब जाकर उनकी सुध लेने वाले सामने आए।
लेकिन सवाल सिर्फ आभा देवी की बदहाली का नहीं है। सवाल उस पूरे सामाजिक तंत्र का है, जो आदर्शों की माला जपता है, मगर अपने आसपास बिखरती इंसानियत को देखने की फुर्सत नहीं निकालता!
रक्सौल की बेहतरी का दावा करने वाले माननीय नगर पार्षदों और पूर्व पार्षदों से एक सवाल तो बनता है—शहर को आदर्श बनाने की घोषणाओं के बीच क्या कभी अपने पड़ोस, अपने समाज और अपने पुराने साथियों के परिवारों का हाल जानने की भी जिम्मेदारी बनती है?
दिवंगत पार्षद ओम प्रकाश पांडे के सा...









