
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुरू की औचक जांच, रजिस्ट्रेशन से लेकर पीसीपीएनडीटी मानकों तक की होगी पड़ताल
बिना निबंधन संचालन, मानकों की अनदेखी और जांच के दौरान केंद्र बंद मिलने के मामलों पर विभाग की नजर; उल्लंघन मिलने पर होगी विधिसम्मत कार्रवाई
रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। विभागीय निर्देश पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों की औचक जांच शुरू होते ही संचालकों में हड़कंप मच गया। मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमित कुमार जायसवाल और डॉ. शमीम अख्तर के नेतृत्व में गठित दो सदस्यीय टीम ने विभिन्न केंद्रों पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की है। वहीं, जांच की सूचना फैलते ही कई केंद्रों के बंद होने की जानकारी सामने आई। कुछ केंद्रों पर ताला लटका मिला।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद मिले। जांच के दायरे में सत्यम अल्ट्रासाउंड, केके रिलायंस, केडी अल्ट्रासाउंड, हैप्पी अल्ट्रासाउंड, शिवम अल्ट्रासाउंड,न्यू जनता अल्ट्रासाउंड, मास्टर अल्ट्रासाउंड और एसआरपी हॉस्पिटल समेत अन्य संस्थान हैं।
हालांकि, किन केंद्रों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
अस्पताल और नर्सिंग होम की आड़ में संचालन की शिकायतें
स्वास्थ्य विभाग की नजर रक्सौल नगर क्षेत्र के साथ प्रखंड क्षेत्र में संचालित उन अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी है, जिनके पास आवश्यक निबंधन और निर्धारित मानकों के अनुपालन को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। आरोप है कि कुछ केंद्र अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लिनिक की आड़ में संचालित हो रहे हैं। वहीं, कुछ केंद्रों पर पूर्व में कार्रवाई के बाद नाम और स्थान बदलकर दोबारा संचालन शुरू करने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ संस्थानों में चिकित्सकों के नाम के बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन उनकी नियमित उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट और तकनीशियनों की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों तथा उनकी वास्तविक उपस्थिति की भी जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। फर्जी डिग्री के आधार पर काम करने की शिकायतों की भी पुष्टि की जानी बाकी है।
लिंग जांच और भ्रूण हत्या जैसे गंभीर मामलों पर भी नजर
अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन में नियमों की अनदेखी केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर कानूनी सवाल भी खड़े करती है। सूत्रों के हवाले से कुछ संस्थानों में अवैध रूप से लिंग परीक्षण किए जाने और इसके आधार पर भ्रूण हत्या जैसे गंभीर अपराधों की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी केंद्र के विरुद्ध ऐसे अपराध का निष्कर्ष जांच एवं साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
नियमों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड केंद्रों को निर्धारित पंजीकरण, योग्य चिकित्सक एवं तकनीकी कर्मियों, आवश्यक संसाधनों और अभिलेखों से संबंधित शर्तों का पालन करना होता है। गर्भधारण-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत भ्रूण के लिंग का पता लगाना या बताना प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
रक्सौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश पर दो सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। टीम को उपलब्ध सूची और जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप केंद्रों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
