
भूमि अधिग्रहण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी, एयरपोर्ट निर्माण के लिए जल्द शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया; रनवे की लंबाई 1372 से बढ़ाकर 2360 मीटर करने का प्रस्ताव
मोतिहारी/रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल एयरपोर्ट को विकसित करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित 139 एकड़ अतिरिक्त जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को हस्तांतरित कर दी गई है। इसके साथ ही वर्षों से लंबित एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को धरातल पर उतारने का रास्ता साफ होने लगा है। अब निर्माण कार्य से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
जिला भू-अर्जन कार्यालय ने अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। जिला प्रशासन की ओर से जमीन एएआई को सौंप दी गई है। अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी बिमल प्रकाश के अनुसार, अधिग्रहित भूमि का हस्तांतरण कर दिया गया है। सरकार की ओर से स्वीकृत मुआवजे की राशि का भुगतान अधिकांश रैयतों को किया जा चुका है। कुछ शेष मामलों की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
रनवे की लंबाई 2360 मीटर करने की योजना
प्रस्तावित लेआउट के अनुसार, रक्सौल एयरपोर्ट के मौजूदा 1372 मीटर लंबे रनवे को बढ़ाकर 2360 मीटर किया जाएगा। इससे एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ने और बड़े विमानों के परिचालन का रास्ता खुलने की उम्मीद है। योजना के तहत एयरपोर्ट के रनवे, एप्रन, टैक्सी-वे, एटीसी टावर और टर्मिनल भवन का निर्माण शामिल है।

1962 के एयरपोर्ट को मिलेगा नया स्वरूप
वर्ष 1962 में बने रक्सौल एयरपोर्ट को ब्राउनफील्ड परियोजना के तहत विकसित करने की योजना है। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से निर्माण संबंधी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना पूरी होने पर रक्सौल सहित पूर्वी चंपारण और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों को हवाई संपर्क की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
भारत-नेपाल सीमा के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना
रक्सौल एयरपोर्ट का विकास केवल हवाई यातायात तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित होने के कारण इससे भारत-नेपाल के बीच व्यापार, पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। खासकर रक्सौल-वीरगंज औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्र के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
एयरपोर्ट शुरू होने से पूर्वी चंपारण और आसपास के जिलों के लोगों को हवाई यात्रा के लिए दूर के शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, रोजगार और स्थानीय कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
अब निगाहें एएआई की आगामी टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं। भूमि हस्तांतरण के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी औपचारिकताओं का पूरा होना महत्वपूर्ण होगा।
