
दिवंगत वार्ड पार्षद ओम प्रकाश पांडे की पत्नी आभा देवी बदहाल हालत में मिलीं; डायल-112 और स्वच्छ रक्सौल की टीम ने पहुंचाया अनुमंडल अस्पताल
रक्सौल। (Vor Desk)। रक्सौल में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। शहर के वार्ड-21 स्थित सब्जी बाजार स्थित निज आवास में एक कमरे में बंद पूर्व शिक्षिका एवं फुलचंद्र साह मध्य विद्यालय की पूर्व प्राचार्य आभा देवी (66) बदहाल हालत में मिलीं। गंदगी और दुर्गंध से भरे कमरे में वह निढाल अवस्था में पड़ी थीं। खुद से खड़ा होना भी उनके लिए संभव नहीं था। गुरुवार की रात गुप्त सूचना पर पहुंची डायल-112 पुलिस टीम और स्वच्छ रक्सौल संस्था के संयुक्त प्रयास से उन्हें रेस्क्यू कर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर समाज की संवेदनशीलता और बुजुर्गों के प्रति पारिवारिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुप्त सूचना पर पहुंची टीम, दरवाजा खुला तो सामने आई बदहाली
जानकारी के अनुसार, गुरुवार की रात महिला की दयनीय स्थिति की गुप्त सूचना मिलने पर डायल-112 मोबाइल टीम के प्रभारी रामानंद सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रंजीत सिंह और महिला प्रभारी शबरा खातून भी टीम के साथ थीं। घर का मुख्य दरवाजा बंद था। बताया जाता है कि गेट की चाबी एक स्थानीय सब्जी विक्रेता के पास थी। टीम के पहुंचने और हो-हल्ला होने के बाद उसके आने पर दरवाजा खोला गया।
घर के भीतर का दृश्य बेहद मार्मिक था। कमरे में कोई देखभाल करने वाला मौजूद नहीं था। आभा देवी कुर्सी पर निढाल अवस्था में मिलीं। आसपास गंदगी और दुर्गंध फैली थी और कई दिनों से रखा सूखा भोजन पड़ा था। अस्वच्छ वातावरण और तेज दुर्गंध के बीच जीवन गुजार रहीं महिला की हालत देखकर रेस्क्यू टीम के सदस्यों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके कई दिनों से समुचित भोजन नहीं मिलने की बात सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।चर्चा और दावा है कि महिला दस पंद्रह दिनों से उक्त स्थिति में थी।
आभा देवी इतनी कमजोर थीं कि अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थीं। उन्हें व्हीलचेयर की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। बताया जाता है कि होश में आने के बाद वह लगातार रो रही थीं। उनकी इस हालत ने मौके पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। परिजनों से संपर्क करने की कोशिश भी की जा रही है।
अनुमंडल अस्पताल में इलाज शुरू, दायां हिस्सा लकवाग्रस्त
रेस्क्यू के बाद आभा देवी को रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. शशि रंजन कुमार ने उनका इलाज शुरू किया। चिकित्सक के अनुसार, महिला काफी कमजोर थीं और उनके शरीर का दायां हिस्सा लकवाग्रस्त है। वह मानसिक तनाव से भी जूझती दिखीं। इलाज के कुछ घंटे बाद उनकी स्थिति स्थिर हुई। फिलहाल उनकी चिकित्सकीय देखरेख की जा रही है।
दिवंगत पूर्व पार्षद की पत्नी हैं आभा देवी
आभा देवी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। वह फुलचंद्र साह मध्य विद्यालय की पूर्व प्राचार्य रह चुकी हैं। उनके पति ओम प्रकाश पांडे वार्ड-21 के पूर्व पार्षद और नगर परिषद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य थे। कुछ वर्ष पूर्व हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था। आभा देवी की तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।अपने आवास पर पति के निधन के बाद अकेली ही रह रही थी।
स्थानीय सूत्रों ने संपत्ति को लेकर रिश्तेदारों के बीच विवाद की आशंका जताई है। यह दावा भी किया जा रहा है कि आभा देवी को कुछ दिन पहले घर से बाहर ले जाया गया था और बाद में उन्हें घर में बंद कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महिला को किन परिस्थितियों में कमरे में रहना पड़ा और उनकी देखभाल क्यों नहीं हो रही थी, यह जांच का विषय है। पुलिस जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मां ने बेटी पर लगाया आरोप, कहा- सबको संपत्ति से मतलब है…!
आभा पांडेय ने संपत्ति विवाद को लेकर अपनी बेटी पर कमरे में बंद रखने का आरोप लगाया है।अस्पताल में होश में आने के बाद आभा पांडेय ने आरोप लगाया कि संपत्ति को लेकर विवाद के बाद उनकी छोटी बेटी ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया था।अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “सबको संपत्ति से मतलब है…” यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।समाचार लिखे जाने तक संबंधित बेटी का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।स्थानीय लोगों के अनुसार, वह करीब एक सप्ताह से घर से बाहर नहीं निकली थीं।इधर,लोगों ने बताया कि उनकी छोटी बेटी, जिसकी शादी हो चुकी है, तीन दिन पहले तक घर आती थी।स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिरी बार वह अपनी मां को गाड़ी में बैठाकर कहीं ले गई थी और बाद में उन्हें वापस घर छोड़ गई थी।इस बीच,स्वच्छ रक्सौल संस्था के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि फोन पर बातचीत के दौरान संबंधित बेटी ने शुक्रवार को आने और अपनी मां की कथित गलतियों के बारे में बताने की बात कही थी।ऐसे में मामले के दोनों पक्षों को सामने रखना जरूरी है।पुलिस के अनुसार, मामले में आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वच्छ रक्सौल ने जताया दुख, पुलिस कर रही जांच
स्वच्छ रक्सौल संस्था के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि एक पूर्व शिक्षिका की ऐसी हालत देखकर मन व्यथित हो जाता है। उन्होंने बताया कि महिला को 50 हजार रुपये से अधिक पेंशन मिलने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद उनकी ऐसी स्थिति समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। थोड़ी भी मानवीय संवेदना और देखभाल मिली होती, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते।
इधर, डायल-112 मोबाइल टीम के प्रभारी रामानंद सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट संबंधित थाने को दे दी गई है। पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम भेज दी गई थी।
अब कई सवालों के जवाब जरूरी
आखिर एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को ऐसी बदहाल स्थिति में क्यों रहना पड़ा? उनकी देखभाल करने वाला कोई क्यों नहीं था? क्या उन्हें वास्तव में कई दिनों तक भोजन नहीं मिला और क्या संपत्ति को लेकर प्रताड़ना की गई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, आभा देवी अनुमंडल अस्पताल में उपचाराधीन हैं। यह घटना केवल एक महिला के रेस्क्यू की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा वह गंभीर सवाल है कि जब उम्र, बीमारी और असहायता के कारण किसी व्यक्ति को दूसरों की मदद की सबसे अधिक जरूरत होती है, तब उसकी सुध लेने वाला कोई न हो तो हमारी सामाजिक संवेदनशीलता किस दिशा में जा रही है।

💔 जिन हाथों ने सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवारा, आज उन्हीं हाथों को सहारे की जरूरत है!
रक्सौल की यह हृदयविदारक घटना केवल एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवाल है।
शहर के जाने-माने समाजसेवी और पूर्व वार्ड पार्षद स्वर्गीय ओम प्रकाश पाण्डेय की पत्नी श्रीमती आभा देवी, जो फूलचंद साह राजकीय मध्य विद्यालय, रक्सौल की प्रधानाध्यापिका रह चुकी हैं, जीवन के अंतिम पड़ाव पर कथित तौर पर बेहद दयनीय स्थिति में मिलीं। सामने आई जानकारी के अनुसार, लकवाग्रस्त अवस्था में वे अपने कमरे में अकेली, भूखी-प्यासी और असहाय थीं। सूचना मिलने पर डायल 112 की पुलिस और समाज के लोग पहुंचे तो उनकी हालत देखकर हर संवेदनशील व्यक्ति का मन व्यथित हो उठा।
आभा देवी ने अपना जीवन बच्चों को शिक्षा देने और अपने परिवार को संवारने में लगाया। उनकी तीन बेटियां हैं। पति का दो वर्ष पूर्व निधन हो गया। आज सवाल किसी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि यह समझने का है कि आखिर एक शिक्षित परिवार की बुजुर्ग मां को ऐसी परिस्थितियों का सामना क्यों करना पड़ा? इस घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जानकारी सामने आनी चाहिए और उनकी देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।
लेकिन यह सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे शिक्षक समाज का है।
रक्सौल के शिक्षक साथियों, शिक्षक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से मेरी विनम्र अपील है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षिकाओं को केवल उनके सेवाकाल तक सीमित न समझें। जिन्होंने जीवनभर समाज और देश की भावी पीढ़ी को शिक्षित किया, उनके बुढ़ापे की चिंता करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
क्यों न स्थानीय स्तर पर शिक्षक संगठन वर्ष में कम से कम एक बार सेवानिवृत्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का स्नेह मिलन समारोह आयोजित करें? उनके घर जाकर हालचाल पूछें, अकेले रह रहे बुजुर्गों की जरूरतें समझें और जरूरत पड़ने पर परिवार, प्रशासन तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से उनकी मदद करें।
यकीन मानिए, सम्मान के दो शब्द, अपनत्व का एक स्पर्श और हालचाल पूछने के लिए उठाया गया एक फोन भी किसी बुजुर्ग के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। ऐसे प्रयासों में शिक्षक साथी अपनी यथाशक्ति सहयोग भी कर सकते हैं।
आज आभा देवी की पीड़ा हमें झकझोर रही है। कल किसी दूसरे शिक्षक या शिक्षिका की बारी भी हो सकती है। यह भी संभव है कि किसी बुजुर्ग के बच्चे दूर हों, असमर्थ हों या पारिवारिक परिस्थितियां कठिन हों। इसलिए बिना पूरी जानकारी के किसी को दोषी ठहराने के बजाय हमें संवेदना, जिम्मेदारी और सहायता का रास्ता चुनना चाहिए।
आखिर हम कैसा समाज बना रहे हैं, जहां दूसरों के बच्चों का भविष्य संवारने वाले गुरुजन अपने जीवन की संध्या में अकेलेपन और असहायता से जूझें?
आइए, शिक्षक समाज की एक ऐसी परंपरा शुरू करें, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद भी गुरुजनों का सम्मान, सुरक्षा और अपनत्व बना रहे।
क्योंकि शिक्षक का सम्मान केवल शिक्षक दिवस पर माल्यार्पण करने से नहीं, बल्कि उनके कठिन समय में साथ खड़े होने से सिद्ध होता है।
🙏 गुरुजनों का सम्मान करें, बुजुर्गों का सहारा बनें और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखें।
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