मधेश की अस्मिता और सत्ता के षड्यंत्र:विद्रोह भड़काने की गहरी चाल है बालेंद्र सरकार की कस्टम टैक्स नीति!
लेखक: भाग्यनाथ प्रसाद गुप्ता
वीरगंज (नेपाल)।नेपाल की वर्तमान राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ राष्ट्रवाद के नाम पर मधेशी जनमानस को प्रताड़ित करने का एक नया सिलसिला शुरू हुआ है। रास्वपा और बालेन सरकार का ताजा फरमान, जिसमें भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य की उपभोग्य वस्तुओं को लाने पर भारी सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लगाने का प्रावधान है, महज एक आर्थिक निर्णय नहीं है। यह मधेश की जनता को आर्थिक रूप से पंगु बनाने और उनमें विद्रोह की भावना भड़काने की एक गहरी साजिश प्रतीत होती है।
ऐसा लगता है कि नेपाल को 'भू-राजनीतिक अखाड़ा' बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है। संसद से एमसीसी (MCC) पारित कराना इसी श्रृंखला की पहली कड़ी थी, जिसने राष्ट्र को परोक्ष रूप से बंधक बना दिया है। अब दूसरी और तीसरी रणनीति के तहत, नेपाल की भूमि का उपयोग अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के हितों साधने के लिए किए जाने...









