Wednesday, June 3

भ्रष्टाचार: 40 हजार घूस लेते रंगे हाथ धराए स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार, रक्सौल अनुमंडल अस्पताल और नेपाल के विवादित दौरों की भी खुलेगी पोल?

रक्सौल (पूर्वी चंपारण)(vor desk)। स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau) की बड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। तिरहुत प्रमंडल के क्षेत्रीय अपर निदेशक, डॉ. अजय कुमार को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए निगरानी टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद से रक्सौल अनुमंडल अस्पताल से जुड़े उनके संदिग्ध दौरों और लिए गए विवादास्पद निर्णयों की जांच की आंच अब बॉर्डर तक पहुंच सकती है।

नोट गिनते हुए दबोचे गए डॉ. कुमार


निगरानी सूत्रों के अनुसार, वैशाली जिले के महनार स्थित एक एएनएम प्रशिक्षण विद्यालय व छात्रावास (ANM Hostel) की प्रभारी प्राचार्य ने निगरानी विभाग से डॉ. अजय कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि गर्भवती होने के कारण वह अपने पति के साथ रह रही थीं।इसके लिए सिविल सर्जन से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ली थी।लेकिन,इस मामले को लेकर डॉ. अजय कुमार उन्हें निलंबित करने की धमकी दे रहे थे।इस लंबित कार्य के बदले अधिकारी द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निगरानी टीम ने गोपनीय जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया।निलंबन की कार्रवाई से बचने के एवज में उन्होंने महिला कर्मचारी से 50 हजार रुपये की डिमांड की थी, जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य के पति विवेक सिंह से सौदा 40 हजार रुपये में तय हुआ।

जैसे ही शिकायतकर्ता ने डॉ. अजय कुमार को 40 हजार रुपये की घूस दी और वे नोट गिन रहे थे, तभी पहले से मुस्तैद निगरानी टीम ने उन्हें दबोच लिया। मौके से उनका विभागीय पहचान पत्र भी बरामद किया गया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद टीम उन्हें अपने साथ ले गई।गिरफ्तारी पटना के गोविंद मित्रा रोड से एक चाय दुकान से हुई।टीम ने रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली है।

रक्सौल में क्यों है हड़कंप?

डॉ. अजय कुमार की गिरफ्तारी के बाद रक्सौल स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। चर्चा है कि निगरानी की टीम जल्द ही रक्सौल का रुख कर सकती है। अप्रैल 2026 से ही डॉ. अजय कुमार का रक्सौल में लगातार आना-जाना था। आधिकारिक दौरों की आड़ में उनकी निजी इनोवा गाड़ी अक्सर अस्पताल परिसर में खड़ी रहती थी और उनके नेपाल (बीरगंज-पोखरा) दौरों की भी खूब चर्चा रही।

विवादित अधिकारियों को दी थी ‘क्लीन चिट’

रक्सौल अनुमंडल अस्पताल लंबे समय से विवादों में रहा है। 30 मार्च 2026 को एक शिकायत की सुनवाई के बाद जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन और उनके पति मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय कुमार को दोषी पाते हुए पद से हटाने, प्रारूप ‘क’ गठित करने और सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया था।
हैरानी की बात यह है कि विभागीय निर्देशों को दरकिनार करते हुए, अप्रैल में रक्सौल पहुंचे डॉ. अजय कुमार ने विवादों में घिरे इन अधिकारियों को न केवल ‘क्लीन चिट’ दे दी, बल्कि उन्हें पुरस्कृत करने की अनुशंसा भी कर दी। उन्होंने अपने बयान में एमबीबीएस डॉ. स्वाति सपन को ‘सर्जन’ तक बता दिया था, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे कि आखिर किसके इशारे पर उन्होंने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया।

निगरानी की रडार पर अस्पताल की फाइलें

निगरानी डीएसपी रीता सिन्हा के नेतृत्व में डीएसपी पवन कुमार सहित अधिकारियों की टीम अब मुजफ्फरपुर स्थित कार्यालय के दस्तावेजों को खंगाल रही है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में डॉ. अजय कुमार ने तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर के आदेश पर मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SKMCH), सदर अस्पताल और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) से जुड़े गंभीर मामलों की तहकीकात की थी।
इसमें एसकेएमसीएच के गार्ड और सिक्योरिटी एजेंसी से जुड़े मामले भी शामिल थे। लंबी जांच और तमाम सबूतों के बावजूद वे कोई विशेष कार्रवाई नहीं कर सके थे, जिससे उनकी कार्यशैली पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। अब निगरानी विभाग इन फाइलों और पुराने मामलों से जुड़े उनके कनेक्शन को भी खंगालने की संभावना जता रहा है।
वहीं,आय से अधिक संपत्ति मामले की भी जांच शुरू हो गई है।संदेह है कि रक्सौल में भी बेनामी प्रापर्टी खरीदी गई है। सूत्र बताते हैं कि रक्सौल अनुमंडल अस्पताल को लेकर डॉ. कुमार द्वारा बनाई गई रिपोर्ट भी अब जांच के दायरे में है। निगरानी ब्यूरो यह पता लगाने में जुटी है कि इन निर्णयों के पीछे की मंशा क्या थी और इसमें किन अन्य लोगों की संलिप्तता है।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब यह देखना अहम होगा कि क्या निगरानी की टीम रक्सौल पहुंचकर अस्पताल के उन पुराने मामलों और फाइलों को भी खंगालेगी, जिनमें नियम-कानूनों को ताक पर रखकर संरक्षण दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!