
रक्सौल/वीरगंज। (vor desk)। नेपाल के बारा जिले की सीमा पर तीन साल पहले हुई एक भारतीय नागरिक की हत्या ने पुलिस की रातों की नींद उड़ा दी थी। अब, तीन साल बाद पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड की गुत्थी सुलझाते हुए मुख्य आरोपी को बेनकाब कर दिया है। यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है, जिसमें प्रेम, विश्वासघात और अपराध की एक गहरी साजिश बुनी गई थी।
‘नेपाल’ को बनाया सेफ जोन, लेकिन पुलिस के जाल में फंसे गुनहगार
25 सितंबर 2023 की वह काली रात, जब भारतीय नागरिक अजीत कुमार सिंह को बेहद चालाकी से बारा के पचरौता नगरपालिका-6 स्थित लक्ष्मिनिया तालाब के किनारे बुलाया गया। अजीत को नहीं पता था कि जिसे वह अपना हमसफर और दोस्त समझ रहा है, वही उसे मौत के घाट उतारने की साजिश रच रहे हैं। हत्यारों का मानना था कि नेपाल की धरती पर हत्या करने से वे भारतीय पुलिस की गिरफ्त से बच जाएंगे, लेकिन उनकी यह सोच गलत साबित हुई।
बेवफाई का खौफनाक अंत
पुलिसिया जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। अजीत की हत्या की पटकथा उसकी अपनी पत्नी सोनम सहनी (23) ने अपने प्रेमी सुजीत कुमार सिंह के साथ मिलकर लिखी थी। साजिश के तहत सुजीत ने अजीत को विश्वास में लेकर उसे मोटरसाइकिल पर बिठाया और सीमावर्ती इलाके में ले गया, जहाँ उसे गोली मार दी गई। इस दौरान तीन अन्य साथी दूसरी बाइक से पूरी वारदात पर पैनी नजर रखे हुए थे। हत्या को अंजाम देने के तुरंत बाद सुजीत ने सिम्रौनगढ़ में बैठी सोनम को फोन कर ‘मिशन सक्सेसफुल’ होने की खबर दी थी। पुलिस ने सोनम को घटना के एक हफ्ते के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया था।
सिर्फ प्रेम नहीं, 8 लाख रुपये और ‘सोने’ का खेल
इस हत्याकांड के पीछे केवल प्रेम संबंध नहीं, बल्कि एक आपराधिक गिरोह का काला चिट्ठा भी जुड़ा है। सुजीत और अजीत एक ही गिरोह के सदस्य थे, जिन्होंने तीन साल पहले भारत के घोड़ासहन में सोने की लूटपाट की थी। लूटे गए सोने से मिले 8 लाख रुपये और छौड़ादानो में जमीन के मुनाफे को लेकर उनके बीच खूनी विवाद चल रहा था, जो अंततः हत्या पर जाकर खत्म हुआ।
पुलिस की बड़ी सफलता: रंजीत मुखिया गिरफ्तार
बारा पुलिस को हाल ही में एक बड़ी कामयाबी मिली है, जब उसने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी रंजीत मुखिया (30) को पचरौता-4 बेलदारी से गिरफ्तार किया। रंजीत, बिहार के मोतिहारी जिले के दर्पा थाना क्षेत्र स्थित तिनकोनी पंचायत का रहने वाला है।
एक गिरोह, कई खौफनाक वारदातें
यह गिरोह सिर्फ अजीत हत्याकांड तक सीमित नहीं था। जांच में पता चला कि:
- यह गिरोह मोतिहारी के दर्पा थाना क्षेत्र के एक उप-प्रमुख की हत्या में भी शामिल रहा है।
- 24 दिसंबर 2022 को बारा के गढ़ीमाई नगरपालिका-2 स्थित भूतही पुल पर भारतीय नागरिक शिवपूजन यादव (44) की हत्या भी इसी गैंग ने की थी, जिस मामले में प्रमोद राम पहले ही जेल की हवा खा रहा है।
अभी भी फरार हैं गुनहगार:
हालांकि पुलिस ने रंजीत मुखिया और सोनम सहनी को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन सुजीत कुमार सिंह, चंचल पांडे, मनीष कुमार सहनी और कामेश्वर सहनी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। बारा पुलिस अब इनके खिलाफ सघन तलाशी अभियान चला रही है।
