एनडीए के ‘पावर हाउस’ को कैबिनेट में जगह नहीं, पूर्वी चंपारण जिले में मायूसी
हैरानी | 12 में से 11 सीटें जीतने वाले पूर्वी चंपारण का प्रतिनिधित्व शून्य, सियासी गलियारों में बहस तेज
मोतिहारी/पटना।(Vor desk)। बिहार कैबिनेट के बहुप्रतीक्षित विस्तार ने पूर्वी चंपारण के सियासी समीकरणों को चौंका दिया है। एनडीए का सबसे अभेद्य किला माने जाने वाले इस जिले को नई सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। गुरुवार को गांधी मैदान में जब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ, तो पूर्वी चंपारण के लोग टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे थे, लेकिन अंततः उनके हाथ सिर्फ मायूसी लगी।
आंकड़ों का गणित और हकीकत
राजनीतिक जानकारों के लिए यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पूर्वी चंपारण ने एनडीए को एकतरफा जनमत दिया था। जिले की 12 विधानसभा सीटों में से 11 पर एनडीए का कब्जा है। भाजपा के 7, जदयू के 2 और लोजपा (रामविलास) के 2 विधायक सदन में जिले का नेतृत्व कर रहे हैं। एकमात्...









