
डॉ. स्वयंभू शलभ ने स्टेशन रोड की ओर अतिरिक्त ब्रांच रोड बनाने और दक्षिणी हिस्से की आरई वाल की लंबाई कम करने की उठाई मांग
रक्सौल। रेलवे गेट संख्या 33ए पर प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण की पहल का स्वागत करते हुए शिक्षाविद् डॉ. स्वयंभू शलभ ने इसके वर्तमान लेआउट प्लान में आवश्यक संशोधन का सुझाव दिया है। इस संबंध में उन्होंने रेलवे बोर्ड एवं पूर्व मध्य रेलवे को अपना प्रस्ताव भेजा है। उनका कहना है कि संशोधन से ओवरब्रिज की उपयोगिता बढ़ेगी और शहर की यातायात व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
रेलवे की ओर से आरओबी 33ए का लेआउट प्लान उपलब्ध कराने पर आभार जताते हुए डॉ. शलभ ने कहा है कि रक्सौल में ओवरब्रिज निर्माण के दौरान रेलवे स्टेशन, शहर की यातायात व्यवस्था और भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की कनेक्टिविटी को एक साथ ध्यान में रखना जरूरी है। रक्सौल स्टेशन भारत और नेपाल के बीच आवागमन एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों, पर्यटकों, व्यापारियों और नेपाल आने-जाने वाले लोगों की आवाजाही होती है।
उन्होंने प्रस्ताव के पहले बिंदु में कहा है कि वर्तमान लेआउट में स्टेशन रोड के पास फ्लाईओवर से नीचे उतरने के लिए केवल सीढ़ी का प्रावधान पर्याप्त नहीं है। स्टेशन रोड की ओर जाने के लिए एक अतिरिक्त ब्रांच रोड बनाया जाना चाहिए। इसके वैकल्पिक सुझाव में उत्तर दिशा से आने वाले फ्लाईओवर को सीधे स्टेशन रोड की ओर उतारने तथा दक्षिण दिशा में बाटा चौक या आश्रम रोड के आसपास एक छोटी दूरी का ब्रांच रोड बनाने की बात कही गई है। इससे यातायात का दबाव विभाजित होगा और जाम की समस्या कम होगी। साथ ही रेलवे गेट 33ए पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने का मूल उद्देश्य भी पूरा हो सकेगा।
दूसरे सुझाव में उन्होंने लेआउट प्लान में प्रस्तावित आरई वाल (रिइनफोर्स्ड अर्थ वाल) की लंबाई पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। प्लान के अनुसार उत्तर दिशा में इसकी लंबाई 83 मीटर और दक्षिण दिशा में 214 मीटर निर्धारित है। उन्होंने दक्षिणी हिस्से की 214 मीटर लंबी आरई वाल की लंबाई कम करने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है, ताकि रक्सौल बाजार के महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र पोस्ट ऑफिस रोड और बैंक रोड पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े।
डॉ. शलभ ने यह भी ध्यान दिलाया है कि आईसीपी बाईपास बनने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही मुख्य रूप से आईसीपी सड़क से होती है। ऐसे में रेलवे गेट 33ए के ऊपर बनने वाला ओवरब्रिज मुख्यतः आम नागरिकों और हल्के वाहनों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि रेलवे बोर्ड और पूर्व मध्य रेलवे इन सुझावों पर तकनीकी एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विचार करेगा, ताकि प्रस्तावित आरओबी रक्सौल की जरूरतों के अनुरूप अधिक उपयोगी साबित हो सके।
