
विजया भारती के लोकगीतों पर झूमे श्रोता, शिव भक्ति से लेकर छठ और मैथिली गीतों तक सजी सुरों की महफिल; सांसद हरि पंत बोले- नेपाल में अब भारत विरोध और इंडिया-चाइना कार्ड की राजनीति नहीं चलेगी
वीरगंज (नेपाल)। (Vor Desk)। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के उपलक्ष्य में रविवार को वीरगंज के टाउन हॉल में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। भारतीय महावाणिज्य दूतावास, वीरगंज और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका विजया भारती एवं उनके समूह ने भारतीय लोक संगीत की विविध विधाओं की मनमोहक प्रस्तुति दी। देशभक्ति गीत से शुरू हुई संगीत संध्या में शिव भक्ति, भोजपुरी, मैथिली, कजरी, झूमर और छठ गीतों के रंग बिखरे। गायिका की सजीव प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रतिनिधिसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) पर्सा के सभापति हरि पंत उर्फ बुद्धि प्रसाद पंत, भारतीय महावाणिज्य दूत देवी सहाय मीणा और गायिका विजया भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि और अन्य आगत अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर तथा पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय महावाणिज्य दूतावास के वाणिज्य दूत मनीष दास ने किया।

‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का प्राण रहा : मीणा
भारतीय महावाणिज्य दूत देवी सहाय मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि यह संगीत संध्या संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का उत्सव है। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ‘आनंदमठ’ में शामिल इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में त्याग, देशप्रेम और आजादी की चेतना जगाई। यह आज भी राष्ट्रीय गौरव और एकता का प्रतीक है।
भारत-नेपाल संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों की मित्रता सदियों पुराने सामाजिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक रिश्तों पर आधारित है। खुली सीमा से बिना पासपोर्ट और वीजा आवागमन दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और आत्मीयता का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में नेपाली नागरिकों के योगदान को भी याद करते हुए कामना की कि सागरमाथा से गंगा तट तक फैली भारत-नेपाल मैत्री और मजबूत होती रहे।
‘भारत विरोध की राजनीति खत्म, इंडिया और चाइना कार्ड नहीं चलेगा’
मुख्य अतिथि सांसद हरि पंत उर्फ बुद्धि प्रसाद पंत ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और नेपाल के बीच संबंध विशिष्ट और ऐतिहासिक हैं। दीपावली और छठ जैसे पर्व दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में बांधते हैं। साझा धार्मिक धरोहर, रीति-रिवाज और पर्व-त्योहार दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता को लगातार मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल में भारत विरोध की राजनीति अब नहीं चलेगी। वर्तमान बालेन सरकार ‘इंडिया कार्ड’ और ‘चाइना कार्ड’ की राजनीति में विश्वास नहीं रखती। भारत और नेपाल के बीच संबंधों को आपसी सम्मान, सहयोग और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

‘वंदे मातरम्’ से शुरुआत, शिव भक्ति के गीतों पर गूंजा हर-हर महादेव
संगीत संध्या की मुख्य आकर्षण रहीं बिहार की लोक गायिका विजया भारती। करीब चार दशक से कला और संगीत की दुनिया में सक्रिय विजया भारती आकाशवाणी और दूरदर्शन की कलाकार हैं। उनकी 11 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे महुआ चैनल की एंकर भी रही हैं। ठुमरी, कजरी और पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति के लिए उनकी विशिष्ट पहचान है।
उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के ‘सुजलाम्-सुफलाम्’ अंश से की। इसके बाद ‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ’ गणेश वंदना से वातावरण को भक्तिमय बनाया। भगवान शिव की स्तुति में ‘डिम-डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया, गंगा के बहावेला हमार जोगिया’ और ‘पार्वती के संग खाए गोला-भंग, अंग भभूति लगावेला हमार जोगिया’ जैसे गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी। इन गीतों पर श्रोता झूम उठे और सभागार हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजने लगा।
हिन्दी के साथ भोजपुरी, मैथिली और छठ गीतों ने बांधा समां
इसके बाद गायिका ने छठ महापर्व और भोजपुरी लोकजीवन से जुड़े गीतों की प्रस्तुति से श्रोताओं को लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। अपनी रचनाओं और पारंपरिक धुनों पर आधारित ‘कागा हमार कहां मान रे’, ‘सैंया के बुला दे, रसिया के बुला दे’ और ‘गौना करा के पिया भइले विदेशिया’ गीतों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
पारंपरिक झूमर ‘कहां गिरल झुमका, कहां गिरल नथिया’ की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया। ‘अंगना गिरल झुमका, ओसरवा नथिया, सेजिया पर गिरल टिकुलिया’ जैसे बोलों के साथ उन्होंने लोकगीत की चुलबुली शैली को जीवंत कर दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि ये हमारे पूर्वजों के गाए पारंपरिक गीत हैं, इन्हें गाने में कैसी लाज। उन्होंने श्रोताओं से इतनी जोरदार तालियां बजाने का आग्रह किया कि उनकी गूंज भारत तक पहुंचे।
इसके बाद ‘मैया के नथिया शोभे हो झूलनी अनमोल’, ‘झूलेली सातों बहिनिया’ और सोने की मटकी तथा गंगा के पानी से जुड़े लोकगीतों की प्रस्तुति दी। मैथिली गीतों की बारी आई तो आकाशवाणी दरभंगा से प्रसारित उनकी रचना ‘यहां के झुमका ना पहिनब, दरभंगा से मंगा दियब, ए सैंया तोरे पइयां पड़ै छी’ ने मिथिला की मिठास घोल दी।
बाल विवाह की कुरीति पर भी लोकगीत से किया प्रहार
विजया भारती ने मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपनी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया। बाल विवाह और बेमेल विवाह की कुरीति पर चोट करते हुए उन्होंने ‘शादी न कैल, बरबादी कइले, हम त लाज करीला, दुल्हा बुढ़वा लागेला’ गीत प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से उन्होंने लोकभाषा में सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में हनुमान भक्ति से जुड़े गीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल गइल’ की प्रस्तुति ने भक्तिमय वातावरण बना दिया। उन्होंने पशुपतिनाथ और जनकपुर के धार्मिक-सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए संगीत के माध्यम से संस्कृति, परंपरा और शालीनता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
वाद्ययंत्रों की संगत ने बढ़ाई प्रस्तुति की खूबसूरती
विजया भारती के साथ अमित ने पैड, सुजीत ने ढोलक, गौरव ने तबला और शशिभूषण ने पियानो पर संगत की। उनके पुत्र भव्य राज ने गिटार संभाला। पश्चिमी संगीत से जुड़े भव्य राज ने पारंपरिक लोकधुनों के साथ वाद्ययंत्रों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में नेपाल-भारत सहयोग मंच के अध्यक्ष अशोक वैद्य, सत्याग्रह नेपाल के संस्थापक चंद्रकिशोर, वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरि गौतम, उपाध्यक्ष माधव राज पाल,गणेश शंकर, राधे श्याम पटेल,लक्ष्मी पौडेल,माधुरी महतो,सहित बारा और पर्सा जिले के प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी उपस्थित थे। वाणिज्य दूत मनीष बी दास ने अपने संचालन के दौरान गीत की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि इस गीत ने अंधकार को दूर कर देश में गुलामी के विरुद्ध चेतना जगाई।
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक गौरवगाथा से शुरू होकर भारत और नेपाल की साझा लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकारों तक पहुंची यह संगीत संध्या दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का यादगार उत्सव बनी।
