
रक्सौल ।(Vor desk)।शहर के पुरानी पोखरा स्थित श्री शिव हरि प्रतिष्ठान में बुधवार की देर शाम भारतवर्ष के अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू एवं रौनियार समाज के पुरोधा के विजयोत्सव कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया. कार्यक्रम में रौनियार समाज के लोगों ने हेमू विक्रमादित्य के जीवन, संघर्ष, सांस्कृतिक वैभव
वीरता ,और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया.

हेमू विक्रमादित्य के चित्र पर किया गया माल्यार्पण
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रौनियार वैश्य बंधु समिति , रक्सौल के अध्यक्ष शिव पूजन प्रसाद गुप्ता ने की. कार्यक्रम के प्रारंभ में हेमू विक्रमादित्य के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया. इसके बाद वक्ताओं ने उनके जीवन और संघर्ष से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डाला.
22 युद्धों में अधिकांश में हासिल की विजय
वक्ताओं ने कहा कि हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू का जन्म वर्ष 1501 में राजस्थान के अलवर जिले में हुआ था. उनके पिता नमक के व्यापारी थे और इसी कारण उनका बचपन हरियाणा के रेवाड़ी में बीता. उस समय भारत में मुगल शासन अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था. हेमू ने युवा अवस्था से ही मुगलों के खिलाफ संघर्ष शुरू किया और अपने जीवनकाल में कुल 22 युद्ध लड़े, जिनमें अधिकांश में उन्हें विजय मिली.

अकबर की सेना को हराकर दिल्ली की गद्दी पर बैठे थे हेमू
वक्ताओं ने कहा कि हेमू की सबसे बड़ी उपलब्धि 7 अक्टूबर 1556 को अकबर की सेना को पराजित कर दिल्ली की गद्दी पर काबिज होना था. इसके बाद उन्हें विक्रमादित्य की उपाधि प्रदान की गयी. हालांकि, 5 नवंबर 1556 को पानीपत की दूसरी लड़ाई में वीरतापूर्वक लड़ते हुए एक तीर उनके नेत्र में लग गया, जिससे वे बेहोश हो गये. इसके बाद उन्हें बंदी बना लिया गया और उनकी हत्या कर दी गयी.
नई पीढ़ी को हेमू के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हेमचंद्र विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के वीर, पराक्रमी और निडर योद्धाओं में शामिल थे। उन्होंने विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने शौर्य और रणनीतिक क्षमता के बल पर इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। वक्ताओं ने कहा कि हेमू का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान और संकल्प से समझौता नहीं किया। ऐसे वीर महापुरुषों के जीवन और संघर्ष से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।
उनके आदर्शों और त्याग को समाज तक पहुंचाना सभी का दायित्व है.
दिल्ली विजय की 470वीं वर्षगांठ पर रौनियार समाज के दर्जनों लोग रहे मौजूद
प्रति वर्ष आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के मौके पर श्री रौनियार वैश्य बंधु समिति के संरक्षक भरत प्रसाद गुप्त, उपाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता,रामजी प्रसाद गुप्ता,सचिव राजेश कुमार गुप्ता(शिक्षक),रमेश कुमार गुप्ता,कोषाध्यक्ष राज कुमार गुप्ता,अंकेक्षक रवि गुप्ता(नगर पार्षद),हरि पूजन प्रसाद,शिव शंकर प्रसाद,नारायण प्रसाद,सुनील कुमार ,राजीव कुमार उर्फ कन्हैया सुनील कुमार सहित रौनियार समाज के दर्जनों लोग मौजूद रहे.
