
रक्सौल।(Vor desk)।
नगर परिषद रक्सौल की कार्यशैली और विकास योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में अब भारत-नेपाल सीमा पर स्थापित 100 फीट ऊंचे ‘हाई मास्ट तिरंगा ध्वज’ के निर्माण कार्य में भी बड़े पैमाने पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और गबन की संभावना जताई गई है। मामले को लेकर रक्सौल के बड़ा बाजार, वार्ड नंबर-21 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार मस्करा ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव को लिखित आवेदन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव को दिए गए ज्ञापन में रवि मस्करा ने उल्लेख किया है कि नगर परिषद रक्सौल द्वारा 26 जनवरी 2026 को भारत-नेपाल सीमा पर 100 फीट ऊंचा तिरंगा ध्वज स्थापित कराया गया था। विभागीय सूत्रों व चर्चाओं के अनुसार इस परियोजना की स्वीकृत लागत 15 लाख रुपये से अधिक बताई गई है, जबकि स्थल पर इसकी वास्तविक ऊंचाई मानक के अनुरूप न होने की बात कही जा रही है। ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि सामान्य दरों पर अन्य स्थानों पर इस प्रकार के 100 फीट ऊंचे तिरंगे ध्वज के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 5 लाख रुपये ही आती है। ऐसे में 15 लाख रुपये से अधिक का बजट दर्शाए जाने पर वित्तीय गबन की आशंका व्यक्त की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने ज्ञापन के माध्यम से जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक तिरंगे से जुड़े इस संवेदनशील मामले की प्रशासनिक स्तर से निष्पक्ष व तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि सत्यता सामने आ सके और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित और राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा की रक्षा के लिए नियमानुसार आगे की विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
