
नेपाल–भारत जनसम्बंधों की आत्मीयता और गहरी करने पर जोर
वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल–भारत सहयोग मंच ने वीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्यदूतावास के महावाणिज्यदूत देवी सहाय मीणा के सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया।
वीरगंज के सरोबर होटल में आयोजित समारोह में महावाणिज्यदूत मीणा ने नेपाल में अपने कार्यकाल के अनुभवों को स्मरण करते हुए आम लोगों से मिले आत्मीय स्नेह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विदेश सेवा में विभिन्न जिम्मेदारियों के दौरान अन्य देशों में भी काम करने का अवसर मिला, लेकिन नेपाल में आम नागरिकों से मिला अपनापन और स्नेह उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
उन्होंने भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास एवं सहयोग कार्यक्रमों से स्थानीय नागरिकों को लाभान्वित होते देख संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के संबंधों को सरकारी स्तर के संवाद के साथ-साथ जनस्तर के निरंतर संपर्क, सहयोग और आत्मीयता से भी मजबूती मिलती है।

मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार वैद्य ने नेपाल और भारत को सुख-दुःख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने वाले पड़ोसी और मित्र देश बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला जनस्तर की आत्मीयता है। उन्होंने नेपाल–भारत मैत्री को और मजबूत बनाने के लिए नागरिक स्तर पर संवाद और सहयोग को आवश्यक बताया।
वैद्य ने बताया कि मंच की ओर से वीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्यदूतावास के महावाणिज्यदूतों के आगमन तथा विदाई के अवसर पर सम्मान समारोह आयोजित करने की परंपरा रही है। उन्होंने वीरगंज के विकास और सीमा-पार आवागमन से जुड़े विभिन्न बुनियादी ढाँचा निर्माण के मुद्दों को लेकर मंच द्वारा लंबे समय से उठाई जाती रही आवाज का भी उल्लेख किया। सुखा बंदरगाह और एकीकृत भन्सार जैसी संरचनाओं के निर्माण के लिए मंच द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने रक्सौल में प्रस्तावित विमानस्थल के निर्माण का मुद्दा भी लंबे समय से उठाते रहने की बात कही।

संविधानसभा सदस्य एवं मधेश प्रदेश के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश शर्मा ने नेपाल–भारत संबंधों में पारस्परिक सहयोग के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय भारत से मिले सहयोग को स्मरण करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यवस्थित तथा जनमुखी बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के उपाध्यक्ष माधव राजपाल, संघ के निवर्तमान अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवी श्याम पोखरेल सहित विभिन्न वक्ताओं ने महावाणिज्यदूत मीणा के कार्यकाल की सराहना करते हुए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।
लेखक चन्द्रकिशोर ने नेपाल–भारत जनसम्बंधों के ऐतिहासिक और सामाजिक आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों को केवल सरकार, कूटनीति अथवा व्यापार के दायरे में रखकर नहीं समझा जा सकता। सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के दैनिक जीवन, पारिवारिक रिश्तों, भाषा, संस्कृति, आवागमन और आर्थिक परस्पर निर्भरता ने इस संबंध को एक विशिष्ट मानवीय आधार दिया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय महावाणिज्यदूतावास स्थानीय समाज के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए शिक्षा, संस्कृति, विकास सहयोग और नागरिक संपर्क के क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाए तो जनस्तर के संबंध और मजबूत हो सकते हैं। सीमापार आवागमन करने वाले सामान्य नागरिकों से लेकर व्यापारी, विद्यार्थी, श्रमिक और सांस्कृतिक समुदाय तक—इन सबके अनुभव और आवश्यकताओं को नेपाल–भारत संबंधों के केंद्र में रखना आवश्यक है।
समारोह में वीरगंज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिकों, उद्योगियों, व्यवसायियों, समाजसेवियों तथा स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।
विदाई के अवसर पर व्यक्त विचारों में एक साझा भाव स्पष्ट रूप से उभरा—नेपाल–भारत संबंधों की मजबूती केवल कूटनीतिक संवाद से नहीं, बल्कि सीमा के दोनों ओर के नागरिकों के बीच कायम विश्वास, आत्मीयता और निरंतर संपर्क से भी निर्मित होती है।
महावाणिज्यदूत मीणा के विदाई के साथ एक कार्यकाल का अंत जरूर हुआ, लेकिन वीरगंज जैसे सीमावर्ती शहर से निर्मित होने वाले नागरिक संबंधों और आत्मीयता की यात्रा निरंतर जारी रहने का संदेश इस समारोह ने दिया।
