Monday, August 10

लोक सभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर रमा देवी के पैतृक घर में सेंध, आदापुर की पुलिसिंग पर सवाल

ताला तोड़कर लाखों की चोरी से सनसनी; महीनों से बंद घर पर चोरों की नजर, आखिर पुलिस की गश्ती और निगरानी कहां थी?

आदापुर (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)। आदापुर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण भेड़ियारी गांव में सामने आया है। भाजपा की पूर्व सांसद सह लोकसभा की पूर्व डिप्टी स्पीकर रमा देवी और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद के पैतृक आवास में अज्ञात चोरों ने ताला तोड़कर भीषण चोरी की घटना को अंजाम दिया। घर से गहने, नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी किए जाने की बात सामने आई है। चोरी गए सामान की वास्तविक कीमत का आकलन पुलिस कर रही है।

यह सिर्फ एक घर में हुई चोरी नहीं है। यह आदापुर की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग पर सीधा सवाल है। जिस इलाके में एक चर्चित राजनीतिक परिवार का पैतृक घर लंबे समय से बंद था, वहां चोरों ने मौका तलाशा, ताले तोड़े, घर में प्रवेश किया, सामान खंगाला और फिर आराम से निकल गए। सवाल यह है कि रात में पुलिस की गश्ती कहां थी? इलाके में निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर कौन रख रहा था?

14 जून को बंद हुआ था घर

जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद स्वास्थ्य खराब होने के कारण इलाज के लिए दिल्ली गए हुए हैं। बताया गया कि वे 13 जून को स्वर्गीय बृज बिहारी प्रसाद की शहादत दिवस कार्यक्रम के सिलसिले में भेड़ियारी आए थे। इसके बाद 14 जून को परिवार के साथ घर में ताला लगाकर दिल्ली चले गए।

पूर्व सांसद रमा देवी भी अपने पैतृक गांव में विशेष कार्यक्रमों के दौरान आती-जाती हैं। लंबे समय से घर बंद होने की जानकारी का फायदा उठाकर चोरों ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया।

सफाईकर्मी पहुंचा तो खुला राज

पूर्व मंत्री के आवास की साफ-सफाई करने वाले भिखारी पटेल ने बताया कि उनके पास केवल बाहरी गेट की चाबी है। वह नियमित रूप से बाहरी हिस्से की सफाई कर वापस चले जाते हैं। सुबह जब वे पहुंचे तो घर के ताले टूटे मिले और गेट खुला था। इसके बाद उन्होंने तत्काल पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद और उनके पुत्र को फोन पर घटना की जानकारी दी।

इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और आदापुर थाना की टीम मौके पर पहुंची।

एफएसएल और डॉग स्क्वायड पहुंचा, लेकिन सवाल भी खड़े हुए

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। चोरी की गुत्थी सुलझाने के लिए एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाकर जांच कराई जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि चोरों की वारदात के बाद जांच में तेजी दिखाना ही पर्याप्त है या चोरी रोकने के लिए पहले से प्रभावी पुलिसिंग भी जरूरी है?

अगर किसी मकान के लंबे समय से बंद होने की जानकारी अपराधियों को हो सकती है, तो क्या स्थानीय पुलिस के पास ऐसे संवेदनशील और बंद मकानों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? अगर रात में पुलिस गश्त होती है, तो क्या उसने इलाके में कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी? और अगर चोर ताला तोड़कर अंदर घुसे और सामान लेकर निकल गए, तो पुलिस की गश्ती व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आदापुर थाना से पूछे जा रहे हैं ये सवाल

आदापुर थाना की भूमिका पर सीधे सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि अपराधियों ने वारदात के लिए समय और स्थान दोनों चुना और पुलिस को इसकी जानकारी घटना के बाद मिली।

  • क्या भेड़ियारी क्षेत्र में रात की नियमित गश्ती होती है?
  • क्या लंबे समय से बंद मकानों की कोई निगरानी व्यवस्था है?
  • क्या इलाके के संदिग्ध लोगों और हालिया गतिविधियों की जांच की गई?
  • क्या घटना वाली रात पुलिस की गश्ती का कोई रिकॉर्ड है?
  • क्या आसपास के सीसीटीवी कैमरों की पहले से निगरानी की जाती है?
  • आखिर चोर किस रास्ते से आए और किस रास्ते से फरार हुए?

इन सवालों का जवाब आदापुर पुलिस को अपनी जांच के जरिए देना होगा।

‘जब पूर्व सांसद के घर की सुरक्षा नहीं, तो आम आदमी का क्या?’

पूर्व सांसद रमा देवी, बिहार सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय बृज बिहारी प्रसाद की पत्नी हैं, जबकि पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद उनके अनुज भाई और देवर हैं। ऐसे राजनीतिक रूप से चर्चित परिवार के पैतृक आवास में चोरी की घटना ने पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर चोर इतने बेखौफ होकर एक पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री के परिवार के बंद घर में घुस सकते हैं, तो आम ग्रामीणों के घर कितने सुरक्षित हैं?

अब सिर्फ बरामदगी नहीं, पुलिस की जवाबदेही भी जरूरी

पूर्व मंत्री के पुत्र मृणाल किशोर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को सूचना दे दी गई है और जांच चल रही है। पुलिस चोरी की संपत्ति का आकलन करने के साथ अपराधियों की पहचान में जुटी है।

अब आदापुर पुलिस के सामने सिर्फ चोरी का खुलासा करने की चुनौती नहीं, बल्कि अपनी पुलिसिंग पर उठ रहे सवालों का जवाब देने की भी चुनौती है। एफएसएल, डॉग स्क्वायड और तकनीकी जांच से अगर सुराग मिलते हैं तो अपराधियों की गिरफ्तारी और चोरी की संपत्ति की बरामदगी जल्द होनी चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ एक घर में हुई चोरी का नहीं है—सवाल यह है कि आदापुर में कानून का डर अपराधियों के मन में कितना बचा है और आम लोगों को पुलिस की सुरक्षा पर कितना भरोसा रह गया है।

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