
तकनीकी मूल्यांकन के बाद बनेगी डीपीआर, 352 एकड़ में विकसित होगा एयरपोर्ट; सीमावर्ती क्षेत्र को मिलेगा सीधा लाभ
रक्सौल। (VoR Desk)। भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। एयरपोर्ट की इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को देश की 10 प्रतिष्ठित कंपनियों से तकनीकी बोलियां प्राप्त हुई हैं। अब इन बोलियों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद चयनित एजेंसी विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), एयरपोर्ट का डिजाइन और निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी।
सांसद प्रतिनिधि राज किशोर राय, भाजपा के युवा नेता गुड्डू सिंह एवं प्रो. मनीष दुबे ने संयुक्त रूप से बताया कि पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल के लगातार प्रयासों का यह महत्वपूर्ण परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय पर पूरी हुईं, तो आगामी लोकसभा चुनाव से पहले रक्सौल से हवाई सेवा शुरू होने की संभावना है।
इन कंपनियों ने जमा की तकनीकी बोली
तकनीकी बोली दाखिल करने वाली कंपनियों में राइट्स लिमिटेड, निप्पॉन कोएई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, टिप्सा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ध्रुव कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड, आरवी एसोसिएट्स आर्किटेक्ट्स इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड, स्टप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वैपकॉस लिमिटेड, कंसल्टिंग इंजीनियर्स ग्रुप तथा फीडबैक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
352 एकड़ में बनेगा एयरपोर्ट
प्रस्तावित रक्सौल एयरपोर्ट 352 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसमें 213 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध है, जबकि शेष 139 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्र सरकार ने 10 जनवरी 2026 को ₹207.70 करोड़ की स्वीकृति दी थी, जिसके बाद परियोजना की प्रक्रिया तेज हुई।
व्यापार, पर्यटन और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
रक्सौल एयरपोर्ट बनने से पूर्वी चंपारण सहित भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे व्यापार, पर्यटन, उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को हवाई यात्रा के लिए पटना या अन्य शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वहीं नेपाल के बीरगंज और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी इस एयरपोर्ट का लाभ मिलने की संभावना है।
अब आगे क्या होगा?
तकनीकी मूल्यांकन के बाद योग्य कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन किया जाएगा। चयनित एजेंसी डीपीआर, मास्टर प्लान और इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करेगी। इसके बाद निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। यह चरण पूरा होने के बाद रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण कार्य का रास्ता और साफ हो जाएगा।
रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना में आई इस नई प्रगति से स्थानीय लोगों, व्यापारिक संगठनों और निवेशकों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
