
रक्सौल (VOR desk): पड़ोसी देश नेपाल में एवियन इन्फ्लुएंजा, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है, ने एक गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। तेजी से फैलते इस संक्रमण ने देश के 10 प्रमुख जिलों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिससे पोल्ट्री उद्योग पूरी तरह से चरमरा गया है।
पशु सेवा विभाग के महानिदेशक डॉ. उमेश दाहाल ने जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमण की शुरुआत झापा, मोरंग और सुनसरी जैसे जिलों से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते यह बारा, चितवन, महोत्तरी, काठमांडू घाटी और नवलपरासी तक पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में ‘आपातकालीन नियंत्रण अभियान’ शुरू करना पड़ा है। अब तक 72 अलग-अलग फार्मों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 5 लाख 15 हजार से अधिक पक्षियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नष्ट किया गया है।
संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासन ने न केवल मुर्गियों को, बल्कि 7 लाख अंडे और 183 टन दाने को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया है। साथ ही, इन प्रभावित क्षेत्रों में अगले दो महीनों के लिए पोल्ट्री व्यवसाय के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। डॉ. दाहाल ने इस दुखद निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि बर्ड फ्लू का कोई इलाज संभव नहीं है, और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए पोल्ट्री उत्पादों को नष्ट करना ही एकमात्र सुरक्षित और अंतिम विकल्प है।
बिहार के पूर्वी चंपारण से सटा होने के कारण बारा जिले की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर है। प्रभावित किसानों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से सरकार ने ‘बर्ड फ्लू नियंत्रण नियमावली, 2078’ लागू की है, जिसके तहत नुकसान झेलने वाले पोल्ट्री मालिकों को उनकी कुल लागत का 75 फीसदी तक मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की वास्तविक राशि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बैठकों में निर्धारित की जाएगी।
पशु चिकित्सा विभाग ने पोल्ट्री मालिकों और आम नागरिकों को जैविक सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन करने की हिदायत दी है। विभाग का कहना है कि यदि पक्षियों में असामान्य मौतें, सुस्ती, सांस लेने में तकलीफ या उनके शरीर के अंगों का रंग नीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसकी सूचना तुरंत अधिकारियों को दी जानी चाहिए। हालांकि, मनुष्यों में इस वायरस के संक्रमण का खतरा फिलहाल कम है, फिर भी एहतियात के तौर पर यह सलाह दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आता है और उसे बुखार, खांसी या मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे बिना देरी किए अपनी स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।
