Saturday, May 16

नेपाल–भारत सीमा पर ₹100 से अधिक सामान पर कर वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक,सीमावर्ती जनता को बड़ी राहत!

अंतिम फैसला आने तक दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर नहीं लगेगा भंसार शुल्क

रक्सौल/काठमांडू।(Vor desk)। नेपाल के सर्वोच्च अदालत ने नेपाल–भारत सीमा नाकों से लाए जाने वाले ₹100 से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए भंसार (कस्टम) शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले हजारों परिवारों, छोटे व्यापारियों और दैनिक खरीदारी करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।

शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल और टेकप्रसाद ढुंगाना की संयुक्त इजलास ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय, अर्थ मंत्रालय समेत संबंधित सरकारी निकायों को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर फिलहाल भंसार शुल्क नहीं वसूलने का निर्देश दिया।

यह विवाद नेपाल सरकार द्वारा नेपाल राजपत्र में प्रकाशित उस अधिसूचना के बाद शुरू हुआ था, जिसमें नेपाल–भारत सीमा से लाए जाने वाले ₹100 से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य भंसार कर लगाने का प्रावधान किया गया था। यह व्यवस्था नेपाल के नए वर्ष 14 April 2026 से लागू की गई थी। इसके बाद वीरगंज, भैरहवा, बीराटनगर सहित तराई–मधेश के कई सीमा नाकों पर जांच और कर वसूली में कड़ाई बढ़ा दी गई थी।

इस फैसले का सबसे अधिक असर रक्सौल–वीरगंज जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के सामान, दवा, किराना, कपड़ा और घरेलू जरूरतों के लिए दोनों देशों के बाजारों पर निर्भर रहते हैं। सीमा पर बढ़ी सख्ती के कारण आम लोगों को बार-बार जांच, कर वसूली और आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने इसे सीमा क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक वास्तविकताओं के खिलाफ बताते हुए विरोध भी जताया था।

इसी निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पण्डित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और प्रशान्त विक्रम शाह ने April 2026 में सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि ₹100 से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर कर लगाना भंसार महसुल ऐन 2081 की धारा 13(2) की भावना के विपरीत है और इससे सीमा क्षेत्र के आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

अधिवक्ता आकाश महतो के अनुसार, कानून की संबंधित धारा में भंसार छुट की व्यवस्था का उल्लेख है, जबकि सरकार की अधिसूचना में छोटे मूल्य के सामान पर भी कर लगाने का प्रावधान कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान इसी आधार पर सरकार की व्यवस्था पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी मांग की थी कि नेपाल–भारत सीमा से आने वाले दैनिक उपभोग के सामान पर लगाए गए कर को तत्काल रोका जाए, क्योंकि इसका सीधा असर सीमावर्ती जनता के जीवन और स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए रिट के अंतिम निपटारे तक सरकार को भंसार शुल्क वसूली से रोक दिया है।

सर्वोच्च अदालत के इस आदेश के बाद सीमा क्षेत्र के लोगों और व्यापारिक संगठनों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों की सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक संरचना एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है, इसलिए ऐसी नीतियां बनाते समय सीमा क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अंतरिम आदेश का हो रहा स्वागत

नेपाल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं वरीय पत्रकार आनन्द कुमार गुप्ता ने सर्वोच्च अदालत के अंतरिम आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र के लोगों का जीवन, बाजार और व्यापार एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मधेश और सीमावर्ती नेपाल के लोग भारतीय सीमांचल बाजारों पर निर्भर हैं, वहीं भारत के सीमा क्षेत्रों का व्यापार भी नेपाली उपभोक्ताओं से चलता है।

उन्होंने कहा कि ₹100 से अधिक के सामान पर भंसार शुल्क लगाने के सरकार के निर्णय से आम नागरिक, छोटे व्यापारी और सीमावर्ती परिवार प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में सर्वोच्च अदालत द्वारा इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाया जाना जनहित और सीमावर्ती जनता के लिए राहतभरा फैसला है।उम्मीद है आगे भी सकारात्मक होगा।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)

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