Thursday, May 14

रक्सौल नगर परिषद्: कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी पर राज्य निर्वाचन आयोग के जांच का शिकंजा, आरोपों को बताया निराधार

रक्सौल।(Vor desk)। नगर परिषद् रक्सौल की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी के खिलाफ पार्षदों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को राज्य निर्वाचन आयोग ने संज्ञान में लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग के इस कड़े रुख के बाद जहां विपक्षी खेमे में हलचल है, वहीं कार्यवाहक सभापति ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद करार दिया है। जांच के आदेश के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

पार्षदों की शिकायत और गंभीर आरोप

वार्ड पार्षद घनश्याम प्रसाद (वार्ड सं. 06), अंतिमा देवी (वार्ड सं. 17) और डिम्पल चौरसिया (वार्ड सं. 24) ने संयुक्त रूप से राज्य निर्वाचन आयोग को आवेदन देकर कार्यवाहक सभापति के विरुद्ध मोर्चा खोला था। पार्षदों का मुख्य आरोप है कि पिछले 9 महीनों से सशक्त स्थायी समिति की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है, जो सीधे तौर पर बिहार नगरपालिका सशक्त स्थायी समिति कार्य संचालन नियमावली-2010 के नियम-03 का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, बिना समिति की सहमति और परामर्श के नगर निधि का मनमाने ढंग से उपयोग करने और जनता के पैसे का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप भी उन पर लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने विस्तार से बताया है कि कार्यवाहक सभापति द्वारा नियमों को दरकिनार कर अपने चहेते वार्डों में अत्यधिक प्राक्कलन बनाकर समरसेबल पंप लगवाए गए हैं। आरोप यह भी है कि उनके पति राकेश कुमार कुशवाहा द्वारा अपने संबंधी की दुकान से बाजार दर से अधिक मूल्य पर पाइप की खरीदारी की गई है, जो कि वित्तीय अनियमितता का विषय है। इसके अलावा, कर संग्राहक पंकज कुमार के नाम पर करोड़ों रुपये की विभागीय विकास योजनाओं का कार्य आवंटित कर नगर निधि की लूट-खसोट करने का दावा भी किया गया है।

आयोग की कार्रवाई

राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए 29 अप्रैल, 2026 को पत्र संख्या-न0नि0 50-19/2024 1749 के माध्यम से जांच का आदेश जारी किया है। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त ने जिला पदाधिकारी-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), पूर्वी चम्पारण को निर्देश दिया है कि परिवाद पत्र में उठाए गए बिंदुओं की जांच किसी वरीय पदाधिकारी से कराकर जांच प्रतिवेदन आयोग को उपलब्ध कराया जाए। पार्षदों द्वारा पुष्पा देवी को पदमुक्त करने की मांग की गई है और अब सभी की नजरें प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

कार्यवाहक सभापति ने बताया आरोपों को निराधार


कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह असत्य और पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर परिषद् के सभी कार्य विधि सम्मत और बोर्ड की पूर्व स्वीकृति के आधार पर ही किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, मुख्य पार्षद का पद 5 अगस्त, 2025 से रिक्त है और उन्होंने 29 अगस्त, 2025 को ही नई समिति के गठन के लिए तीन पार्षदों को नामित कर दिया था, परंतु जिला स्तर पर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण समिति पूर्ण रूप से क्रियाशील नहीं हो सकी है।इस मामले में पुष्पा देवी ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 21(3) और सर्वोच्च न्यायालय के ‘अफजल इमाम बनाम बिहार सरकार’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड (सदन)सर्वोपरि है। स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय की भी बोर्ड में संपुष्टि जरूरी होती है।उनका उद्देश्य शहर का विकास है और विपक्षी पार्षद केवल राजनीतिक लाभ के लिए विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। सभापति ने जांच का स्वागत करते हुए कहा कि वे प्रशासनिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगी और उन्हें विश्वास है कि जांच के बाद सत्य सबके सामने आ जाएगा।

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