
काठमांडू/वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल सरकार द्वारा भारतीय बाजारों से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लेकर नेपाल प्रवेश करने पर अनिवार्य भंसार (कस्टम टैक्स) लगाने की नीति अब सरकार के लिए ही बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। सीमा क्षेत्रों में इस व्यवस्था को “शॉक ट्रीटमेंट” की तरह देखा जा रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ी है। बढ़ते विरोध और जनआक्रोश के बीच अब सरकार भी नरम रुख अपनाती दिखाई दे रही है।
नेपाल के अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने मंगलवार को अर्थ समिति में आयोजित चर्चा के दौरान संकेत दिया कि 100 रुपये की वर्तमान सीमा में संशोधन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह नियम वर्तमान सरकार द्वारा नहीं बनाया गया था, लेकिन सीमा क्षेत्र के लोगों की कठिनाइयों को देखते हुए इसमें बदलाव पर विचार हो रहा है।
दरअसल, नेपाल सरकार ने भारतीय सीमावर्ती बाजारों से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर भंसार शुल्क अनिवार्य कर दिया है। इस नियम का सबसे अधिक असर तराई-मधेश और भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में देखा जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच दशकों से रोटी-बेटी और रोजी-रोटी का गहरा संबंध रहा है। सीमावर्ती लोग दैनिक जरूरतों का सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और छोटे व्यापार के लिए अक्सर दोनों ओर आवाजाही करते रहे हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य खरीदारी तक मुश्किल हो गई है। इतना ही नहीं, शादी-विवाह और पारिवारिक कार्यक्रमों में रिश्तेदारों के लिए उपहार ले जाना भी लोगों के लिए संकट का विषय बन गया है। सीमा क्षेत्र के कारोबार, छोटे व्यापार और आम आवाजाही पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।
इस नीति को लेकर तराई-मधेश में भारी नाराजगी देखी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के ही सीमा क्षेत्र से जुड़े सांसद अब इस नीति के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया, जिसके बाद सरकार पर नियम में ढील देने का दबाव बढ़ गया है।
हालांकि सरकार ने साफ किया है कि राजस्व चोरी और तस्करी के मामलों में सख्ती जारी रहेगी। अर्थमंत्री डॉ. वाग्ले ने कहा कि घरेलू सामान के नाम पर दिनभर कई बार सीमा पार कर सामान ढोने की प्रवृत्ति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और तस्करी रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।
