
वीरगंज।(Vor desk)। में मधेश आंदोलन के प्रणेता माने जाने वाले स्वर्गीय बाबा राम जनक तिवारी की 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। वीरगंज घंटाघर स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर भाग्य नाथ गुप्ता ने की। इस दौरान मधेशवादी नेता एवं अधिवक्ता , अधिवक्ता , शशी कपूर मियाँ, नेजामुद्दीन समानी, शिव पटेल, शम्भु गुप्ता, श्याम गुप्ता, अखिलेश प्रसाद सहित स्व. तिवारी के पौत्र अधिवक्ता , परिवारजन, समर्थक और पत्रकार मौजूद रहे।
सभी अतिथियों ने स्व. बाबा राम जनक तिवारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए अधिकार संपन्न, समृद्ध मधेश तथा विकसित नेपाल निर्माण का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिवक्ता सुरेन्द्र कुर्मी ने कहा कि मधेश और मधेसी समुदाय की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में स्व. बाबा राम जनक तिवारी की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पदों तक मधेश की भागीदारी सुनिश्चित होने के पीछे बाबा तिवारी के संघर्ष और आंदोलन की बड़ी भूमिका है। उन्होंने सबसे पहले मधेशी समुदाय के हक-अधिकार के लिए संगठित आवाज उठाई थी।
उन्होंने बताया कि स्व. तिवारी का जन्म वि.सं. 1971 के असोज माह में वीरगंज में हुआ था और वि.सं. 2056 में उनका निधन भी वीरगंज में ही हुआ। कुर्मी ने कहा कि बाबा भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन लोकतंत्र, मधेश और जनता के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करता है।
उन्होंने आगे कहा कि स्व. तिवारी ने युवावस्था से ही 2007 साल की क्रांति, पंचायती व्यवस्था विरोधी आंदोलन तथा 2046 के जनआंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कई बार जेल जाने के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। नेपाल सद्भावना पार्टी को मजबूत बनाने और नेता को आगे बढ़ाकर मधेशी मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. भाग्यनाथ गुप्ता ने कहा कि 2007 साल से ही मधेश और मधेसी जनता के अधिकारों के लिए सबसे पहले आवाज उठाने वाले योद्धा स्व. बाबा राम जनक तिवारी ही थे। उन्होंने तराई कांग्रेस के माध्यम से मधेश के साथ हो रहे भेदभाव का विरोध किया तथा हर्क गुरुङ के बसाइँसराइ प्रतिवेदन जैसी मधेश विरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि मधेश की संस्कृति, भाषा, वेशभूषा और सम्मान की रक्षा करना बाबा तिवारी के जीवन का प्रमुख उद्देश्य था। सादा जीवन और उच्च विचार उनकी पहचान थी तथा राजनीतिक जीवन में वे ईमानदारी की मिसाल माने जाते थे।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण अधिवक्ता आशुतोष तिवारी ने दिया, जबकि मंच संचालन वीरगंज कपड़ा बैंक के अध्यक्ष एवं पत्रकार लालबाबु सिंह ने किया।
