
मोतिहारी/रक्सौल (पूर्वी चंपारण।(Vor desk) ।बिहार में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत, निगरानी विभाग की टीम ने शनिवार (11 अप्रैल) की सुबह एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने आदापुर थाना में अवैध रूप से ‘मुंशी’ का काम कर रहे एक व्यक्ति, इंतखाब आलम को ₹14,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ़्तार कर लिया। यह कार्रवाई पुलिस व्यवस्था और थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
नए एंगल से देखें पूरी कहानी: पूर्व सैनिक की शिकायत और ‘ट्रैप’दलाल का थाना पर कब्ज़ा:
पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरफ़्तार इंतखाब आलम कोई सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि एक ‘निजी व्यक्ति’ (प्राइवेट मुंशी या दलाल) था, जो काफी समय से आदापुर थाने में पुलिस के अहम कागजात और लिखा-पढ़ी का काम अवैध रूप से देख रहा था।

पूर्व सैनिक को बनाया निशाना:
खबर के अनुसार, आदापुर के रहने वाले एक पूर्व सैनिक, आफताब, अपने दिवंगत पिता के नाम पर जारी आर्म्स (हथियार) लाइसेंस को अपने नाम पर ट्रांसफर करवाने की प्रक्रिया में जुटे थे। इसके सत्यापन के लिए उनके दस्तावेज़ आदापुर थाने आए थे।
घूस की डिमांड
थाना परिसर में सक्रिय अवैध मुंशी इंतखाब आलम ने आफताब के इन कागजातों पर थाने की सरकारी मुहर लगवाने के एवज में ₹14,000 की रिश्वत मांगी। व्यवस्था से परेशान पूर्व सैनिक ने हार मानने के बजाय निगरानी विभाग में इसकी गुप्त शिकायत दर्ज करा दी।
यमुनापुर चौक पर ‘क्लाइमेक्स’:रंगे हाथ गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम के अधिकारियों ने मामले का सत्यापन किया।शनिवार की अहले सुबह, निगरानी की टीम आदापुर थाना क्षेत्र के यमुनापुर चौक पर एक ऑटो में सादे लिबास में इंतखाब का इंतज़ार करने लगी। जैसे ही इंतखाब आलम, पीड़ित आफताब से ₹14,000 की रिश्वत की रकम लेने पहुंचा, टीम ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।
आरोपों की बौछार:”थानाध्यक्ष के लिए ले रहा था पैसा”
गिरफ़्तारी के बाद इंतखाब आलम ने एक बड़ा खुलासा किया। उसने दावा किया कि वह रिश्वत का पैसा अपने लिए नहीं, बल्कि आदापुर थानाध्यक्ष (SHO) पप्पू पासवान के लिए ले रहा था।
विजिलेंस का रुख: इस गंभीर आरोप पर निगरानी विभाग के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ने कहा है कि अब तक के सत्यापन में थानाध्यक्ष की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए, अभी उनका नाम लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की जांच के दौरान यदि थानाध्यक्ष का नाम सामने आता है, तो उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
थानाध्यक्ष की ‘कबूलनामा’ और एसपी का ‘एक्शन’
इस पूरे मामले में आदापुर के थानाध्यक्ष, पप्पू पासवान संदेह के दायरे में है। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्होंने दावा किया कि वे आर्म्स के कागजातों पर पहले ही अपने हस्ताक्षर कर चुके थे। साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गिरफ़्तार व्यक्ति (इंतखाब) “काफी दिनों से थाने में काम कर रहा है।” यह स्वीकारोक्ति अपने आप में एक बड़ा सवाल है कि एक अनाधिकृत व्यक्ति को थाने के गोपनीय और सरकारी दस्तावेज़ों तक पहुँच कैसे मिली?
एसपी ने बैठाई जांच:
मामले की गंभीरता को देखते हुए मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।उन्होंने आदापुर थानाध्यक्ष की भूमिका की जांच की ज़िम्मेदारी रक्सौल एसडीपीओ (SDPO) मनीष आनंद को सौंप दी है।
एसपी स्वर्ण प्रभात ने मीडिया को बताया कि निगरानी के शिकंजे में आए इस ‘दलाल’ के घर पर भी छापेमारी की जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि कहीं उसके घर पर थाने के अन्य कोई अहम सरकारी कागजात तो मौजूद नहीं हैं।साथ ही कॉल डिटेल भी खंगाले जा रहे हैं।
