
वीरगंज (नेपाल)।(Vor desk)। आस्था, परंपरा और भक्ति के अनूठे संगम के साथ वीरगंज स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ गहवा माई मंदिर में चैत्र वासंतिक नवरात्र की महाअष्टमी धूमधाम से मनाई गई। इस विशेष अवसर पर गुरुवार को माता की भव्य ‘निशान सह डोली यात्रा’ निकाली गई, जिसमें सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों (रक्सौल) और स्थानीय नेपाल के हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।


अनुष्ठान और यात्रा का रूट
धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत अलसुबह मूल पुजारी राधेश्याम उपाध्याय द्वारा की गई मंगला आरती, निशान पूजा और डोली पूजन के साथ हुई। शाम 4 बजे गाजे-बाजे और पुष्प वर्षा के बीच मंदिर परिसर से शोभा यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों— रेशम कोठी, रोड नंबर 2, वीरता माई मंदिर, अलखिया मठ, मेन रोड, महावीर मंदिर और घंटाघर—से होते हुए नगर परिक्रमा कर वापस मंदिर पहुंची।

प्रमुख सहभागिता और आकर्षण
इस ऐतिहासिक यात्रा में माई स्थान मंदिर संचालन समिति के नरेंद्र कुमार साह और गहवा माई रथ यात्रा समिति के श्याम पोखरेल सक्रिय भूमिका में दिखे।भक्ति की शक्ति ऐसी थी कि श्रद्धालुओं के साथ साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं कंधे पर माता की डोली उठाकर नगर भ्रमण कराया।

भक्तों का हुजूम: लाल वस्त्रों में सजे सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु हाथों में जय माता दी अंकित भगवा ध्वज लेकर झूमते-गाते चल रहे थे।
सजावट: मंदिर को दुल्हन की तरह फूलों और बिजली की लड़ियों से सजाया गया था। शाम को दीप प्रज्वलन और विशेष महाआरती आकर्षण का केंद्र रही।
परंपरा और सुरक्षा
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई इस यात्रा ने लगातार तीसरी बार भव्यता का रिकॉर्ड बनाया। ज्ञात हो कि जून 2023 में मंदिर के आधुनिक जीर्णोद्धार के बाद से यह आयोजन नियमित हो गया है। वीरगंज की यह परंपरा शारदीय नवरात्र की ‘फूलपाती’ से भी जुड़ी है, जहाँ नेपाल सेना द्वारा माता की डोली को सलामी देने का रिवाज है।
