सीमाई रक्सौल में चुनाव : समस्याओं का पहाड़, जाम-गंदगी, सांढ़ और सिस्टम से जूझता जनजीवन पूछ रहा सवाल!कौन करेगा निदान?
रक्सौल, पूर्वी चंपारण।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा पर बसा सीमाई नगर रक्सौल, जो कभी अच्छे और समृद्ध व्यापारिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, आज समस्याओं के पहाड़ तले दबा हुआ है।बिहार विधानसभा चुनाव 11 नवंबर को होने वाला है, लेकिन रक्सौल की जनता अब भी पूछ रही है — “विकास कहाँ है?”
विकास अधूरा, सुविधाएँ नदारद
रक्सौल में ना स्टेडियम है, ना पार्क, ना बच्चों के खेलने की कोई व्यवस्था।युवाओं के लिए खेलकूद या व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र तक नहीं हैं।अंबेडकर चौक का गोलंबर, ओवरब्रिज और पुल निर्माण अधर में लटका है।सड़कें जर्जर, और रिंग रोड का सपना आज भी अधूरा है।
जाम में फंसी जिंदगी
रेलवे फाटक (ढाला) के लंबे समय तक बंद रहने से जाम की समस्या भयावह रूप ले चुकी है।अब तक एक दर्जन से अधिक गंभीर मरीजों की मौत एम्बुलेंस के जाम में फँसने से हो चुकी है।प्रसूता महिलाएं भी समय पर डंकन ...









