‘प्यासा शहर, दरियादिल पार्षद’: रक्सौल की जल-त्रासदी में उम्मीद बने सोनू गुप्ता
रक्सौल।(Vor desk)।जहां एक ओर सूर्य की गर्मी 40 डिग्री के पार तप रही है, वहीं धरती की कोख से पानी 200 फीट नीचे चला गया है। आकाश और धरती, दोनों ने रक्सौल को झुलसा दिया है। नगर में हर कोने से एक ही आवाज़ आ रही है — “पानी चाहिए!”
बूढ़े हों या बच्चे, महिलाएं हों या युवा – हर वर्ग पानी की तलाश में रोज़ाना संघर्ष कर रहा है। जिन घरों की महिलाएं कभी चौखट नहीं लांघती थीं, आज वो भी बाल्टी-बोतल लेकर गलियों में दौड़ रही हैं। यह 21वीं सदी के भारत के विकासशील चेहरे पर एक करारी चोट है।
सरकार ने करोड़ों की योजना बनाई – "हर घर नल-जल"। लेकिन हकीकत में यह योजना सिर्फ कागजों पर ही पूरी हुई। रक्सौल नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 19 की स्थिति इसका जीता-जागता उदाहरण है।
वार्ड पार्षद सोनू गुप्ता के अनुसार, नल-जल योजना के तहत उनके वार्ड में 507 घरों में कागजों पर नल लग चुके हैं, लेकिन हकीकत यह ...









