
पूर्वी-पश्चिमी चंपारण के पशुपालकों को अनुदान पर मिलेंगी तीन-तीन बकरियां, उत्पादों की ब्रांडिंग के साथ बाजार उपलब्ध कराने की भी तैयारी
रक्सौल।(Vor desk)। चंपारण मटन की लोकप्रियता को अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। बिहार सरकार इस चर्चित व्यंजन को महज खानपान की पहचान तक सीमित रखने के बजाय इसे पशुपालन, स्वरोजगार और ग्रामीण आय बढ़ाने के मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में बकरी पालन को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना के तहत चयनित पशुपालकों और लाभार्थियों को अनुदान पर तीन-तीन बकरियां उपलब्ध कराने की योजना है।
ग्रामीण विकास मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने शुक्रवार को रक्सौल स्थित सिंचाई विभाग के आइबी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा बकरी पालन को ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बनाने की है। इसके साथ ही पशुपालकों के उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की जाएगी, ताकि उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके।
चंपारण के नाम पर कारोबार, असली उत्पाद की पहचान पर सवाल
मंत्री ने चंपारण मटन की ब्रांडिंग और प्रामाणिकता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में चंपारण मीट के नाम से दुकानें संचालित हो रही हैं। लेकिन यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि वहां वास्तव में चंपारण का मीट पहुंच रहा है या केवल चंपारण के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार इस पहचान को प्रमाणिक और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बकरी के दूध की गुणवत्ता और ब्रांडिंग को भी बढ़ावा देने की बात कही। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर बकरी पालन बढ़े, पशुपालकों को बाजार मिले और चंपारण के नाम से बिकने वाले उत्पादों की अपनी विश्वसनीय पहचान बने। इससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
प्रेस वार्ता में सांसद डॉ. संजय जायसवाल, भाजपा संगठन जिला रक्सौल के जिलाध्यक्ष अशोक पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद थे।
