
नगर परिषद कार्यालय सह जन सुविधा केंद्र पर धरना-प्रदर्शन, 11 सूत्री मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम; सफाई और जलापूर्ति समेत नागरिक सेवाओं पर मंडरा सकता है संकट
रक्सौल। (Vor Desk)। दीपावली से पहले शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। एक ओर नगर परिषद के सामने पर्व के दौरान सड़कों, गलियों और बाजारों की साफ-सफाई की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लंबित मांगों को लेकर नगर निकाय कर्मियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। शुक्रवार को रक्सौल नगर परिषद कार्यालय सह जन सुविधा केंद्र पर कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने साफ संकेत दिया कि मांगें नहीं मानी गईं तो दीपावली के आसपास शहर की नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाईज फेडरेशन, बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में स्थायी, दैनिक, संविदा, अंशकालिक और आउटसोर्सिंग कर्मियों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
महासंघ के महासचिव चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर पूर्व में समझौते और आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक सरकार और विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इसी के विरोध में पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 11 सूत्री मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 3 नवंबर 2026 से पूरे बिहार में अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हड़ताल की स्थिति में नगर निकायों की सफाई, कचरा उठाव, जलापूर्ति और अन्य जरूरी नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। ऐसे में दीपावली के दौरान बाजारों, मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों में सफाई व्यवस्था बाधित होने की आशंका से नगरवासियों की चिंता बढ़ सकती है।
नियमितीकरण से लेकर पेंशन तक 11 सूत्री मांगें
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा, समान काम के लिए समान वेतन, ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना तथा बकाया वेतन का भुगतान शामिल है। इसके अलावा लंबित पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का शीघ्र निष्पादन, कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की राशि संबंधित खातों में नियमित जमा कराने तथा एनपीएस में निकाय के अंशदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की मांग उठाई गई।
प्रदर्शन में प्रेम मलीक, राजेश मलीक, यमुना राउत, सोनू राम, सुजीत कुमार, मोख्तार आलम, ओमप्रकाश राउत और सुनैना देवी सहित सैकड़ों नगर परिषद कर्मी शामिल रहे।
अब निगाहें सरकार और विभागीय स्तर पर होने वाली पहल पर टिकी हैं। यदि वार्ता से समाधान नहीं निकला तो दीपावली के ठीक पहले नगर निकायों की हड़ताल शहर की सफाई और जरूरी सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
