
एसएसबी के पंटोका कैंप में बहुउद्देशीय जनकल्याण शिविर का आयोजन, मानव एवं पशु चिकित्सा के साथ नशामुक्ति अभियान
रक्सौल। (Vor Desk) बिहार में शराबबंदी के बाद युवाओं में सूखे नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने सीमावर्ती क्षेत्र में नशामुक्ति और जनजागरूकता अभियान को गति दी है। इसी क्रम में एसएसबी की 47वीं वाहिनी की ओर से सीमावर्ती गांव पंटोका स्थित वाइब्रेंट विलेज में नागरिक कल्याण कार्यक्रम एवं मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के तहत बहुउद्देशीय जनकल्याण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें नशामुक्त भारत अभियान के साथ मानव एवं पशु चिकित्सा शिविर, कंप्यूटर प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र वितरण और मशरूम की खेती के प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल, एसआरपी अस्पताल रक्सौल के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. सुजीत कुमार तथा एसएसबी की 47वीं वाहिनी के कमांडेंट संजय पांडेय ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई।

युवाओं में मोबाइल की लत भी गंभीर चुनौती
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने शराब, गांजा, चरस और अन्य मादक पदार्थों के सेवन के साथ मोबाइल की लत को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने युवाओं से किताबों को अपना मित्र बनाने और मोबाइल का उपयोग जरूरत के अनुसार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोबाइल का सही इस्तेमाल होना चाहिए और युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए।
एसआरपी अस्पताल के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार ने नशामुक्ति अभियान के तीन प्रमुख उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहला लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाना, दूसरा नशे की लत से जूझ रहे लोगों का उपचार कराना और तीसरा समाज को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित करती है।

नशामुक्ति अभियान के दौरान सरस्वती विद्या मंदिर तथा डंकन अस्पताल के नर्सिंग स्कूल के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर लोगों को नशे से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया। नाटक के माध्यम से बताया गया कि नशे की लत किस तरह गंभीर बीमारियों, आर्थिक परेशानी और पारिवारिक विघटन का कारण बन सकती है।
एसएसबी कमांडेंट संजय पांडेय ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के साथ समाज को नशे से दूर रखना और युवाओं को जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है। नशामुक्त भारत अभियान के माध्यम से स्वस्थ, सशक्त और जागरूक राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है। सांसद डॉ. जायसवाल ने एसएसबी के कार्यों की सराहना करते हुए नशे के विरुद्ध अभियान और सीमा पर मादक पदार्थों की जब्ती के प्रयासों की प्रशंसा की।

ग्रामीणों को मिला मुफ्त इलाज और दवा
शिविर में एसएसबी की 47वीं वाहिनी और एसआरपी अस्पताल रक्सौल के संयुक्त तत्वावधान में वृहद निःशुल्क मानव चिकित्सा शिविर लगाया गया। इसमें विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ग्रामीणों की जांच कर परामर्श दिया और मुफ्त दवाइयां वितरित कीं। साथ ही पशु चिकित्सा शिविर में पशुओं की जांच और निःशुल्क दवा वितरण की व्यवस्था की गई।

शिविर में पंटोका, धुपवाटोला, भरतमही, महादेवा, सेनुवरिया और रक्सौल बाजार समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने अपना और अपने पशुओं का उपचार कराया। चिकित्सा व्यवस्था में एसएसबी की मेडिकल टीम के साथ निजी अस्पताल की टीम ने भी सहयोग किया।

कंप्यूटर प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र बांटे, मशरूम की खेती का प्रशिक्षण शुरू
मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के तहत ग्राम भरतमही के 15 युवक-युवतियों के लिए आयोजित 30 दिवसीय बेसिक कंप्यूटर कोर्स का समापन हुआ। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वहीं, सेनुवरिया और कंगली गांव के नागरिकों के लिए 15 दिवसीय मशरूम की खेती का प्रशिक्षण शुरू किया गया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं और चिकित्सा शिविर में योगदान देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर एसएसबी के कमांडेंट चिकित्सा डॉ. निशिकांत, उप कमांडेंट आमोद, उप कमांडेंट नवीन कुमार साह, रक्सौल के एसडीएम नागमणि कुमार वर्मा, सहायक कमांडेंट दिनकर त्रिपाठी और अंकित कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। भारत विकास परिषद, सीमा जागरण मंच और लायंस क्लब रक्सौल के सदस्यों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों तथा 47वीं वाहिनी के जवानों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
