Friday, October 2

रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: अब 50 बेड वाले IPD में नर्स स्टेशन चालू, गंभीर बीमारियों का भी यहीं होगा मुफ्त इलाज

रक्सौल (vor desk) सीमावर्ती इलाकों के लोगों को अब छोटी-मोटी बीमारियों या आपातकालीन स्थिति में इलाज कराने के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रक्सौल स्थित 50 बेड वाले अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है। अब यहाँ केवल प्रसव ही नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी भर्ती कर 24 घंटे उच्च स्तरीय चिकित्सीय देखरेख दी जा रही है।

बड़े अस्पतालों की तर्ज पर 24 घंटे अलर्ट मोड में ‘नर्स स्टेशन’ मरीजों की निरंतर निगरानी और बेहतर नर्सिंग केयर के लिए इन-पेशेंट विभाग (आईपीडी) में एक आधुनिक ‘नर्स स्टेशन’ स्थापित किया गया है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए है जिन्हें 24 घंटे या उससे अधिक समय तक डॉक्टर और नर्स की देखरेख अथवा सर्जरी की आवश्यकता होती है। ड्यूटी पर मौजूद जीएनएम अर्चना और बीना ने बताया कि उपाधीक्षक के निर्देशानुसार तीनों शिफ्टों में जीएनएम की अलग-अलग तैनाती की गई है। मरीजों की वाइटल चेकिंग, दवाओं की समय पर उपलब्धता और नियमित मॉनिटरिंग अब सीधे इसी नर्स स्टेशन से सुनिश्चित की जा रही है।

आपातकालीन व गंभीर बीमारियों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन ने बताया कि अब अस्पताल में प्रसव के अलावा सड़क दुर्घटना में चोट, मारपीट में कटने-फटने, सर्पदंश, डायरिया, चमकी बुखार (एइएस), तेज बुखार, श्वास व पाचन संबंधी रोग, गंभीर संक्रमण, क्रोनिक व मेटाबॉलिक स्थितियों तथा सामान्य शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का इलाज शुरू कर दिया गया है। वहीं राउंड पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग का कड़ा निर्देश है कि मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर रेफर करने के बजाय यहीं भर्ती कर पूरा इलाज मुहैया कराया जाए।

निजी अस्पतालों के चक्कर से मुक्ति, मरीजों को मिला नया जीवन अस्पताल की इस नई व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों को भारी राहत मिल रही है। आईपीडी में भर्ती डायरिया व हाई फीवर के 45 वर्षीय मरीज शिवम कुमार ने अस्पताल में समय पर मिल रही चिकित्सीय देखरेख की खुलकर तारीफ की। वहीं चमकी बुखार से पीड़ित 50 वर्षीय मरीज भिखारी गोसाईं की पत्नी चंपा देवी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि कई निजी अस्पतालों में भटकने के बाद वे यहाँ पहुँची थीं। यहाँ बिना किसी खर्च के मुफ्त दवा, मुकम्मल इलाज और डॉक्टरों की अच्छी देखरेख से उनके पति की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा रक्सौल अस्पताल भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) और राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के दिशानिर्देशों के तहत तैयार किया गया यह नर्स स्टेशन रक्सौल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों को अब गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त इलाज अपने ही शहर में उपलब्ध हो रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों से बड़ी निजात मिली है।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)

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