
सफाईकर्मी काम से बाहर, सड़क-मोहल्लों में जमा कचरा; दुर्गंध और संक्रमण के खतरे से परेशान शहरवासी
रक्सौल।(Vor desk)। नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का मंगलवार को छठा दिन रहा, लेकिन गतिरोध खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिखे। कर्मियों के काम पर नहीं लौटने का सीधा असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। रक्सौल के कई हिस्सों में नियमित उठाव नहीं होने से कचरा जमा होता जा रहा है। मुख्य सड़कों, बाजारों, चौक-चौराहों और आवासीय इलाकों में कचरे के ढेर के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सबसे बड़ी चिंता जनस्वास्थ्य को लेकर है। जगह-जगह जमा कचरे से दुर्गंध निकल रही है। बारिश और उमस के बीच कचरे के लंबे समय तक पड़े रहने से मच्छर-मक्खियों के बढ़ने और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में हड़ताल जितनी लंबी खिंचेगी, सफाई व्यवस्था पर दबाव उतना ही बढ़ने की आशंका है।
30 जुलाई से आंदोलन, अब अनिश्चितकालीन हड़ताल
बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 30 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू हुआ था। मांगों पर समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया गया।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार और नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से उनकी मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संगठन वार्ता शुरू करने और मांगों के समाधान की मांग पर अड़े हैं।
नियमितीकरण से समान वेतन तक कई मांगें
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में अस्थायी कर्मियों का नियमितीकरण, ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर सीधी नियुक्ति, समान काम के लिए समान वेतन, ईएसआई-ईपीएफ सहित सामाजिक सुरक्षा का लाभ और लंबित भुगतान शामिल हैं।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के महामंत्री चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि जब तक सरकार मांगों पर सकारात्मक पहल कर बातचीत शुरू नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
अधिकारियों की हड़ताल ने बढ़ाई प्रशासनिक चुनौती
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, एक कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या की घटना के बाद कार्यपालक पदाधिकारियों के स्तर पर भी आंदोलन चल रहा है। ऐसे में नगर निकायों के प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी संवाद की स्थिति नहीं बन पा रही है।
सवाल: हड़ताल का समाधान या शहर की वैकल्पिक सफाई?
छठे दिन रक्सौल में स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि कर्मचारियों की मांगों के समाधान के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था को तत्काल कैसे संभाला जाए। हड़ताल समाप्त होने तक यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो जमा कचरे का संकट और गंभीर हो सकता है।
शहरवासियों की नजर अब सरकार, नगर परिषद और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। मांगों पर गतिरोध बना रहा तो रक्सौल में सफाई संकट का असर आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकता है।
