
जगद्गुरु वामाचार्य सेवक संजय नाथ के सान्निध्य में गूंजा ‘जय मां काली’ व ‘जय गुरुदेव’ का जयघोष
रक्सौल।(Vor desk)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को रक्सौल की काली नगरी स्थित तांत्रिक काली मंदिर से जगद्गुरु वामाचार्य सेवक संजय नाथ के सान्निध्य में भव्य शाही शोभायात्रा निकाली गई। इसमें भारत और नेपाल से आए हजारों साधु-संत, नागा बाबा, बैरागी, उदासी, गोरखपंथी संत तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे नगर में “जय मां काली” और “जय गुरुदेव” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
प्रातः गुरु पूजन, गुरु दीक्षा एवं विशेष अनुष्ठान के बाद दोपहर में शोभायात्रा काली मंदिर से प्रारंभ हुई। चांदी का त्रिशूल धारण किए पीठाधीश्वर जगद्गुरु वामाचार्य सेवक संजय नाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए रथ पर सवार रहे। यात्रा आश्रम रोड, बैंक रोड, पटेल पथ, पोस्ट ऑफिस रोड, थाना परिसर, मेन रोड और कोइरिया टोला होते हुए पुनः मंदिर पहुंची।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया। पार्वती तिवारी के नेतृत्व में काली सेना के कार्यकर्ताओं तथा गुरु अखाड़ा के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली। त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष और भभूत से सुसज्जित संतों की पारंपरिक वेशभूषा आकर्षण का केंद्र रही, जबकि महिलाओं ने कलश यात्रा और भक्ति गीतों से आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। रक्सौल के अंचलाधिकारी अरविंद कुमार दंडाधिकारी के रूप में तैनात रहे, जबकि थानाध्यक्ष रमेश महतो ने पुलिस बल के साथ पूरे मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। नगर परिषद ने भी स्वच्छता एवं यातायात की विशेष व्यवस्था की थी।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह भव्य शोभायात्रा भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण बन गई।
*गुरु पूर्णिमा का महत्व
सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा को गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का महापर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन कर उनसे ज्ञान, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रक्सौल में आयोजित यह भव्य शाही शोभायात्रा भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक एकता का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरी।
