
रक्सौल।(Vor desk)। सीमावर्ती शहर रक्सौल में महिला सशक्तिकरण की एक नई और प्रेरक इबारत लिखी गई है। ‘स्वच्छ रक्सौल’ संस्था द्वारा संचालित महिला प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 50 महिलाओं के लिए एक भव्य प्रमाण-पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली क्षण का साक्षी बनने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनीष आनंद और प्रशिक्षु आईपीएस सह रक्सौल थानाध्यक्ष हेमंत सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। तीनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और महिलाओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वतंत्र हों। उन्होंने कहा कि एक प्रशिक्षित महिला केवल अपना भविष्य नहीं संवारती, बल्कि पूरे परिवार की रीढ़ बनती है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अब अपना सिलाई केंद्र या ब्यूटी पार्लर खोलकर न केवल खुद के लिए आय का स्रोत तैयार करेंगी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर समाज में मिसाल कायम करेंगी।

इस कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह था जब बोलने और सुनने में असमर्थ प्रशिक्षु निशा कुमारी को प्रमाण-पत्र दिया गया। निशा की इस सफलता ने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो तो शारीरिक अक्षमता कभी बाधा नहीं बनती। निशा के साथ-साथ कुमारी निक्की, आशा कुमारी, आर्या देवी, खुशनुमा खातून और प्रियंका देवी सहित अन्य महिलाओं ने भी सफलता के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा कर अपनी आत्मनिर्भरता की मुहर लगाई। अधिकारियों ने ‘स्वच्छ रक्सौल’ के इस नेक कार्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे महिलाओं के सम्मान और स्वावलंबन के लिए एक मील का पत्थर बताया।

स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने संस्था के संकल्प को दोहराते हुए बताया कि उनका लक्ष्य केवल यहीं रुकना नहीं है, बल्कि इस पहल के जरिए 200 से अधिक महिलाओं को तकनीकी रूप से कुशल और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रशिक्षित महिलाएं आने वाले समय में रक्सौल की आर्थिक तस्वीर बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यह पूरा अभियान क्षेत्र की महिलाओं के बीच आत्मविश्वास भरने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है।
