Friday, May 1

रक्सौल के ‘मौत के पुल’ पर बढ़ा जनता का आक्रोश, डॉ. गौतम ने प्रशासन को सौंपा समाधान का ब्लूप्रिंट


​रक्सौल।(Vor desk)। शहर का कोइरिया टोला नहर चौक, जिसे अब स्थानीय लोग ‘5 करोड़ी पुल’ के बजाय बदहाली का पर्याय मानने लगे हैं, पिछले कई वर्षों से जनता के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। निर्माणाधीन पुल की कछुआ चाल और आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग मीडिया विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गौतम कुमार ने रक्सौल अनुमंडल पदाधिकारी को एक लिखित सुझाव पत्र सौंपकर जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस समाधान की मांग की है।
​डॉ. गौतम ने अपनी शिकायत में रक्सौल की जनता के दर्द को साझा करते हुए कहा कि पिछले साल यह अधूरा पुल दानिश जावेद नामक युवक की जान ले चुका है,दर्जनों घायल हुए है । स्थिति इतनी विकट है कि आए दिन टेंपो और ई-रिक्शा पलटने से लोग लहूलुहान हो रहे हैं। चिलचिलाती धूप में घंटों जाम में फंसी जनता बेहाल है, लेकिन जनप्रतिनिधि और विभाग मौन साधे बैठे हैं। प्रशासन को केवल जाम हटाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ रहा है, जबकि समस्या की जड़ पुल के पास की संकीर्णता है।
​अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार और तेज-तर्रार प्रशिक्षु आईपीएस सह रक्सौल थानाध्यक्ष हेमंत कुमार को सौंपे गए पत्र में डॉ. गौतम ने एक व्यावहारिक तकनीकी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पुल के दोनों ओर वर्तमान में केवल 7 मीटर का डायवर्जन है, जो भारी दबाव झेलने में असमर्थ है। यदि इस डायवर्जन को 50 मीटर के दायरे में फैलाकर लगभग 20 फीट चौड़ा कर दिया जाए, तो नहर चौक पर होने वाली जाम की समस्या एक दिन के भीतर समाप्त हो सकती है। उन्होंने प्रशासन को चेताया है कि यह कार्य मात्र एक दिन का है और यदि इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो रक्सौल की जनता को इस नरक से मुक्ति मिल सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस सुझाव पर कितनी तत्परता से अमल करता है या जनता इसी तरह धूल और जाम के बीच पिसती रहती है।हालाकि, अधिकारियों ने इस बाबत उचित व सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।

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