Thursday, April 23

रक्सौल पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए बैठक,चमकी बुखार को ले कर चौपाल लगाने और गाडा सिल वैक्सिंनेशन पर जोर

रक्सौल।(Vor desk)।

​रक्सौल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के सभागार में गुरुवार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य रूप से आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलेटरों के साथ वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आगामी कार्ययोजनाओं पर गहन मंथन किया गया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदाधिकारियों और समन्वयकों ने भाग लिया, जिनमें बीसीएम सुमित सिन्हा, जय प्रकाश कुमार, देवेश कुमार मिश्रा, दीपक कुमार सिंह और सौरभ मिश्रा प्रमुख रूप से शामिल रहे।

​बैठक के दौरान डॉ. जायसवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नया सर्वे कर ‘ड्यू लिस्ट’ को तत्काल अपडेट करें। विशेष रूप से परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता के लिए एफपीएलएमआईएस पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा अपलोड करने के सख्त निर्देश दिए गए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं का ऑनलाइन रिकॉर्ड पारदर्शी बना रहे। साथ ही, टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।

​गंभीर रोगों से बचाव की दिशा में चर्चा करते हुए पीएचसी प्रभारी डा अमित ने किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिम पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि 14 से 15 वर्ष की वैसी किशोरियां, जिन्हें अब तक एचपीवी  वैक्सीन नहीं लगी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कवर किया जाए। स्वास्थ्य कर्मियों को सलाह दी गई कि वे समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए अभिभावकों के साथ सीधा संवाद करें और उन्हें गाडा सिल


वैक्सीन की महत्ता के प्रति जागरूक करें।

​गर्मी के मौसम के दस्तक देने के साथ ही चमकी बुखार (एईएस) के खतरे को देखते हुए बैठक में विशेष एहतियात बरतने को कहा गया। अप्रैल से अगस्त तक इसके बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शहरी और ग्रामीण स्तर पर ग्राम चौपाल लगाकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। डॉ. जायसवाल ने बताया कि 6 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को तेज धूप से बचाना और उन्हें रात में खाली पेट न सोने देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को रात में कुछ मीठा खिलाएं और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही बिना समय गंवाए अस्पताल लाएं। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मरीजों के लिए 24 घंटे निःशुल्क एंबुलेंस उपलब्ध है और निजी वाहन से मरीज लाने पर दूरी के आधार पर नकद भुगतान का भी प्रावधान है।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)

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