Friday, April 24

रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में गहराया विवाद: भ्रष्टाचार के खुलासे के बीच उपाधीक्षक ने phc प्रभारी पर दर्ज कराई यौन उत्पीड़न की FIR


​मोतिहारी/रक्सौल।(Vor desk)।रक्सौल से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां रक्सौल अनुमंडल अस्पताल इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा आंतरिक विवाद और गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है।
एक तरफ जहां जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने अस्पताल में ‘रेफरल सिंडिकेट’ चलाने के मामले में अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन और उनके पति डॉ. विजय कुमार को दोषी पाते हुए उन पर विभागीय कार्रवाई और स्थानांतरण का आदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ डॉ. स्वाति सपन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार पर यौन उत्पीड़न और छेड़खानी के गंभीर आरोप लगाकर मामले को नया मोड़ दे दिया है।सरकारी अस्पताल के दो चिकित्सकों के आमने सामने आने की घटना अब आम चर्चा का विषय बन गया है।

​लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का सख्त आदेश से खलबली

​अस्पताल के भीतर गरीब मरीजों के आर्थिक शोषण का मामला 2 जनवरी 2026 की एक घटना से शुरू हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा भारती की शिकायत पर हुई जांच में यह पाया गया कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला, कविता कुमारी को सरकारी अस्पताल में सुविधाएं होने के बावजूद ऑपरेशन के लिए डरा-धमकाकर डॉ. स्वाति सपन के निजी नर्सिंग होम ‘एल.एम. मेमोरियल’ भेज दिया गया था।विरोध पर दुर्व्यवहार किया गया।अगले ही दिन डंकन हॉस्पिटल में महिला ने नॉर्मल डिलीवरी में बच्चे को जन्म दिया था। जांच समितियों ने पाया कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का डेटा ऑनलाइन ‘भव्य’ पोर्टल पर दर्ज न कर मैनुअल रजिस्टर में रखा जाता था।जांच में कई अनियमितताएं पाई गई थी। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने 30 मार्च 2026 को सुनाए अपने फैसले में डॉ. स्वाति सपन और उनके पति डॉ. विजय को गंभीर नैतिक और प्रशासनिक अनियमितता का दोषी पाया और उनके विरुद्ध ‘प्रपत्र क’ गठित करने और जांच पूरी नहीं होने तक अन्यत्र स्थानांतरण का आदेश जिला प्रशासन व सिविल सर्जन को दिया।

​यौन उत्पीड़न की प्राथमिक और ओटी के भीतर की घटना

​भ्रष्टाचार की जांच के समांतर ही अस्पताल के भीतर एक गंभीर आंतरिक विवाद भी पनप रहा था। उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन ने 2अप्रैल को मोतिहारी महिला थाने में प्राथमिकी (FIR संख्या 31/26-(02/04/26 4/674/75/78/79/351(2)(3) बीएनएस) दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि PHC प्रभारी डॉ. राजीव रंजन कुमार लंबे समय से उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। डॉ. स्वाति का आरोप है कि 7 अगस्त 2025 की शाम जब वह ऑपरेशन थिएटर के भीतर एक मरीज का ऑपरेशन कर रही थीं, तब डॉ. राजीव रंजन ने उनके साथ अश्लील और आपत्तिजनक हरकत की।उन्होंने मेरे पीठ और कूल्हे का स्पर्श किया।पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि जब से मेरी अस्पताल में पदस्थापना है,तब से वे बुरी नजर रखते रहे हैं।कई बार मेरी बांह पकड़ लेते थे और अनुचित शारीरिक स्पर्श(पीछे से छुना करते थे)।इस अनुचित अशोभनीय व्यवहार के बार बार विरोध करने पर रवैया यथावत रहा। उन्हें अंजाम भुगतने और करियर तबाह करने की धमकियां दी गईं।उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा है कि पूर्व में इसकी सूचना डीएम,एसपी,सिविल सर्जन को भी लिखित रूप में दी थी।

​’वर्चस्व की जंग’ बनाम ‘गरिमा की लड़ाई’

​इन आरोपों पर डॉ. राजीव रंजन कुमार का पक्ष पूरी तरह अलग है। डॉ. रंजन, जो 10 सितंबर 2025 तक स्वयं अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक थे और जिन्होंने डॉ. स्वाति को पदभार सौंपा था, ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत और छवि खराब करने वाली साजिश बताया है। उनका कहना है कि यह विवाद अस्पताल के भीतर ‘कुर्सी और वर्चस्व’ की लड़ाई का परिणाम है। गौर करने वाली बात यह है कि डॉ. राजीव रंजन उसी जांच समिति के सदस्य बनाए गए थे जो डॉ. स्वाति के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रही थी। 24 मार्च 2026 को उन्होंने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर यह कहते हुए जांच से हाथ खींच लिए थे कि उन पर शर्मनाक और गंभीर आरोप लगाकर उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।निष्पक्ष जांच करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान का खतरा हो सकता है।

​प्रशासनिक हलचल और जांच की स्थिति

​इस दोहरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ अनियमितता के सिद्ध आरोपों के बाद डॉ. स्वाति सपन और डॉ. विजय कुमार पर गाज गिरी है और 30 दिनों के भीतर स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए निर्देशित किया गया है, तो दूसरी तरफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जिला स्तरीय टीमें सक्रिय हो गई हैं।मामला तुल पकड़ने के बाद गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के रीजनल असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ अजय कुमार भी पहुंचे।वहीं, मोतिहारी महिला थानाध्यक्ष मोना कुमारी के नेतृत्व में महिला थाना पुलिस टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य संकलन शुरू कर दिया है।उधर,स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच के लिए टिम गठित कर दिया है,जो जांच कर रही है ।बताया गया है कि आवेदन रक्सौल थाना में भी दी गई,लेकिन,बाद में मोतिहारी महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

अस्पताल परिसर में इस बात को ले तरह तरह की चर्चा है जिसे, पेशेवर प्रतिस्पर्धा और निजी रंजिश से भी जोड़ा जा रहा है। फिलहाल, प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि ये आरोप सत्य हैं या फिर भ्रष्टाचार की जांच से ध्यान भटकाने और वर्चस्व स्थापित करने का एक हिस्सा।इस पूरे प्रकरण पर समाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा भारती ने कहा है कि आरोप तब तक आरोप है,जब तक सिद्ध नहीं हो जाता।सत्य सत्य ही रहता है,झूठ टिकता नहीं है।उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष -उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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