Friday, April 24

सरहद पर ‘मैत्री’ की सफाई या रक्सौल नगर परिषद की रुसवाई? पड़ोसी देश के श्रमदान ने स्थानीय प्रशासन पर खड़े किए बड़े सवाल

रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल में शुक्रवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने अंतरराष्ट्रीय मित्रता की मिसाल तो पेश की, लेकिन साथ ही स्थानीय नगर प्रशासन की कार्यक्षमता की पोल भी खोल दी। भारत-नेपाल मैत्री पुल और भारतीय कस्टम क्षेत्र के आसपास एसएसबी (SSB) और नेपाल की बीरगंज महानगरपालिका की टीम ने संयुक्त रूप से व्यापक सफाई अभियान चलाया। इस अभियान में नेपाल की ओर से नेपाल पुलिस के डीएसपी राजू कार्की और नेपाल एपीएफ के डीएसपी विकास कुमार सहित कई अधिकारियों ने स्वयं श्रमदान किया।

अर्थ मंत्री के दौरे से पहले सक्रियता और जन आक्रोश

सीमा क्षेत्र में कचरा हटाने के साथ-साथ धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव भी किया गया। हालांकि, इस सक्रियता के पीछे एक प्रमुख कारण नेपाल के अर्थ मंत्री का शुक्रवार को होने वाला बीरगंज कस्टम और बॉर्डर क्षेत्र का निरीक्षण माना जा रहा है। एक ओर जहां सीमा पर इस पहल की सराहना हो रही है, वहीं रक्सौल के नागरिकों में स्थानीय नगर परिषद के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का चुभता हुआ सवाल यह है कि क्या रक्सौल नगर परिषद इतनी लाचार हो चुकी है कि उसे अपने क्षेत्र की सफाई के लिए पड़ोसी देश की टीम की मदद की जरूरत पड़ रही है?

लाखों के खर्च और ‘सड़ते’ उपकरणों का गंभीर मामला

नगर परिषद की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए समाजसेवी नुरुल्लाह खान ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। खान के अनुसार, सफाई के नाम पर प्रत्येक वार्ड में प्रति माह औसतन दो लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके अतिरिक्त एनजीओ के माध्यम से भी लाखों की बंदरबांट हो रही है। उन्होंने दावा किया कि उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है, जिसके कारण सैकड़ों कूड़ेदान और हाथ-रिक्शा बिना उपयोग के ही कबाड़ में तब्दील हो गए। वहीं, काली सेना प्रमुख सह भाजपा नेत्री पार्वती तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नगर परिषद की अकर्मण्यता के कारण केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार की छवि पर उंगली उठ रही है, जबकि सरकार स्वच्छता के लिए पर्याप्त फंड मुहैया करा रही है।

ऑडिट की मांग और दो अरब की योजनाओं पर संशय

नगर परिषद के भीतर से भी विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। नगर पार्षद घनश्याम प्रसाद ने मांग की है कि नगर के सफाई खर्चों का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए, जिससे एक बड़ा घोटाला उजागर होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस वर्ष प्रस्तावित करीब दो अरब रुपये की विकास योजनाएं तब तक धरातल पर नहीं उतर पाएंगी, जब तक कि परिषद की मौजूदा कार्यशैली में सुधार नहीं होता।

अधिकारियों का पक्ष: ‘सूचना का अभाव’ बनाम ‘सीमाई विश्वास’

विवाद पर सफाई देते हुए रक्सौल नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी कन्हैया यादव ने कहा कि परिषद नियमित रूप से अपने क्षेत्राधीन मैत्री पुल के आधे हिस्से और कस्टम एरिया की सफाई करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाली टीम के भारतीय क्षेत्र में आकर सफाई करने की कोई लिखित सूचना उन्हें प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने माना कि नियमों के तहत विदेशी टीम को इसकी पूर्व सूचना देनी चाहिए थी। इसके विपरीत, एसएसबी के सहायक सेनानायक सचिन कुमार ने इस अभियान का सकारात्मक पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से दोनों देशों के संबंधों में मजबूती आती है और आपसी विश्वास बढ़ता है।

​फिलहाल, इस घटनाक्रम ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या स्वच्छता केवल बड़े दौरों और विशेष आयोजनों तक सीमित रहनी चाहिए, या स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए धरातल पर काम करेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!