
रक्सौल (VOR DESK): केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड (श्रम संहिता) के विरोध में रक्सौल नगर परिषद के सफाईकर्मियों ने गुरुवार को मोर्चा खोल दिया। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) और बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष सफाईकर्मियों ने हिस्सा लिया और छह सूत्री मांगों को लेकर नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर जमकर नारेबाजी की।
‘मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश’ – यूनियन का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे महासंघ के महासचिव कामरेड चंद्रशेखर कुमार ने नए श्रम कानूनों को पूरी तरह मजदूर विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्व के 29 महत्वपूर्ण श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए कोड लागू किए हैं, जो श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये कानून मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की ओर एक कदम हैं।
नए कानूनों पर उठाए गए प्रमुख सवाल:
यूनियन नेताओं ने हड़ताल और संगठन बनाने की शर्तों में किए गए बदलावों पर तीखी आपत्ति जताई:
- यूनियन का गठन: पहले 60 मजदूरों पर यूनियन बनाने का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 300 कर दिया गया है।
- हड़ताल का अधिकार: पहले किसी मांग के लिए 14 दिनों के नोटिस पर आंदोलन किया जा सकता था, लेकिन अब इसके लिए दो महीने का नोटिस अनिवार्य कर दिया गया है।
- कार्य के घंटे: समान मजदूरी में कार्य की अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक करने की बाध्यता का खतरा बढ़ गया है।
- हड़ताल पर पाबंदी: यदि किसी संस्थान में 300 से कम मजदूर हैं, तो वे अपनी जायज मांगों के लिए भी धरना-प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे।
नारेबाजी और प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान सफाईकर्मियों ने हाथों में झंडे और बैनर लेकर ‘चार लेबर कोड वापस लो’, ‘आउटसोर्सिंग बहाली बंद करो’, ‘एनजीओ का एग्रीमेंट रद्द करो’ और ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि इन कानूनों को तत्काल वापस लिया जाए और न्यूनतम मजदूरी दर में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 12 फरवरी को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर राष्ट्रीय आम हड़ताल की गई थी, जिसमें विद्यालय रसोईया संघ और अन्य संगठनों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
प्रदर्शन में शामिल मुख्य चेहरे
इस आंदोलन को सफल बनाने में महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, कुणाल ठाकुर, सत्य प्रकाश कुशवाहा, पितांबर यादव, आनंद सिंह, प्रमोद राम, राजेश मलिक, विनोद मलिक, प्रेम मलिक, लीला देवी, सीता देवी, प्रमिला देवी, ताहिर मियां, मुन्ना, अनुज और विश्वनाथ राम सहित सैकड़ों कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और श्रम कानूनों को वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।
