
रक्सौल।(Vor desk)। अनुमंडल मुख्यालय स्थित सभागार में सोमवार को प्रशासनिक तत्परता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में अनुश्रवण सह सतर्कता समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण और मैनुअल स्कैवेंजर पुनर्वास अधिनियम 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा। चर्चा की शुरुआत करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने समिति के सदस्यों द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों को न केवल गंभीरता से सुना, बल्कि स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी कि दलित व वंचित समाज से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।
न्याय की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से अनुमंडल पदाधिकारी ने पुलिस प्रशासन को विशेष रूप से आड़े हाथों लिया। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को सख्त हिदायत दी कि लंबित चार्जशीटों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, क्योंकि पुलिसिया देरी अंततः पीड़ितों के न्याय के अधिकार का हनन करती है। बैठक के दौरान केवल कानूनी मामलों तक ही सीमित न रहकर, एसडीएम ने सामाजिक कल्याण की व्यापक रूपरेखा पर भी बात की। उन्होंने वासभूमि, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं पर संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान निकालने का निर्देश दिया ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सुलभ हो सके।
वहीं, हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा के समूल उन्मूलन और प्रभावित परिवारों के उत्थान पर जोर देते हुए मैनुअल स्कैवेंजर पुनर्वास अधिनियम की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे ऐसे परिवारों का नए सिरे से चिह्नीकरण करें और उन्हें सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार के साथ-साथ आवश्यक प्रशिक्षण और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ें। समन्वय और जवाबदेही पर आधारित इस बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनीष कुमार, प्रशिक्षु आईपीएस सह थानाध्यक्ष हेमंत सिंह और अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी ब्रजेश कुशवाहा सहित कई अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी विभाग आपसी तालमेल बढ़ाकर सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जमीनी स्तर पर मजबूती से लागू करेंगे।
