
करीब 100 बच्चों के बीच बांटी गईं कॉपी-किताबें, कलम, मिठाई और पटाखे; सामाजिक समानता, सम्मान और भाईचारे का दिया संदेश
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। (Vor Desk)। भारत-नेपाल सीमा पर बसे रक्सौल में दीपावली का एक ऐसा नजारा दिखा, जिसमें त्योहार की खुशियां केवल घरों और बाजारों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सामाजिक समानता और अपनत्व का संदेश लेकर दलित बस्ती तक पहुंचीं। अनुमंडल प्रशासन के अधिकारी बस्ती के बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ दीपावली मनाकर खुशियां साझा कीं। इस पहल ने पर्व के सामाजिक सरोकारों को भी सामने रखा।
एसडीओ नागमणि कुमार वर्मा और एसडीपीओ मनीष आनंद सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब 100 बच्चों के बीच कॉपी, किताबें, कलम, मिठाइयां और पटाखे वितरित किए। अधिकारियों ने बच्चों के साथ आतिशबाजी की और त्योहार की खुशियों में सहभागी बने। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर बच्चे भी उत्साहित दिखे। उनके लिए यह अवसर उपहार मिलने के साथ-साथ अधिकारियों के साथ सीधे संवाद और मेलजोल का भी रहा।

इस आयोजन का संदेश महज दीपावली की मिठाई और पटाखे बांटने तक सीमित नहीं था। इसके जरिए समाज के उन वर्गों तक पहुंचने की कोशिश दिखी, जिनके बीच सार्वजनिक जीवन और सामाजिक आयोजनों में समान भागीदारी का सवाल महत्वपूर्ण है। अधिकारियों ने बच्चों के साथ समय बिताकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि पर्व की खुशियों पर हर व्यक्ति और हर समुदाय का समान अधिकार है। सामाजिक पहचान या आर्थिक स्थिति किसी के सम्मान और सहभागिता के बीच बाधा नहीं बननी चाहिए।
कार्यक्रम में शैक्षणिक सामग्री का वितरण भी खास रहा। कॉपी-किताब और कलम देकर बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित किया गया, जबकि मिठाई और पटाखों ने उनके त्योहार को खास बनाया। इस तरह आयोजन में शिक्षा को प्रोत्साहन देने और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने, दोनों पहलुओं को शामिल किया गया।
भारत-नेपाल सीमा के इस शहर में प्रशासन की यह पहल सामाजिक समरसता का सकारात्मक संदेश देती दिखी। हालांकि सामाजिक समानता का भाव केवल पर्व विशेष के आयोजनों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार, अवसरों की समानता और सम्मानजनक भागीदारी से मजबूत होता है। ऐसे आयोजन उस दिशा में संवाद और भरोसे की शुरुआत का माध्यम बन सकते हैं।
