Saturday, November 7

रक्सौल-वीरगंज बॉर्डर पर मछली तस्करी का बड़ा खेल, टैक्स चोरी के भी संकेत

प्रतिबंधित थाई मांगुर से लेकर समुद्री मछलियों तक के अवैध कारोबार की सूचना; तांगा, ई-रिक्शा, साइकिल और बाइक से हो रही ढुलाई, आयात-निर्यात के दस्तावेजों में भी हेराफेरी की आशंका

रक्सौल। (Vor Desk)। भारत-नेपाल के रक्सौल-वीरगंज बॉर्डर पर मछली के कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर तस्करी और सीमा शुल्क चोरी का खेल चलने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। खुली सीमा का लाभ उठाकर जहां तांगा, ई-रिक्शा, साइकिल और बाइक के जरिए मछलियों की खेप एक देश से दूसरे देश पहुंचाई जा रही है, वहीं द्विपक्षीय आयात-निर्यात के नाम पर भी कथित हेराफेरी किए जाने की खबर है। इस पूरे कारोबार में टैक्स चोरी के जरिए लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

सबसे गंभीर सूचना प्रतिबंधित मछलियों के कारोबार और समुद्री मछलियों (सी फिश) की कथित अवैध तस्करी को लेकर है। बताया जा रहा है कि मछलियों की प्रजाति, वास्तविक वजन और दस्तावेजों में दर्ज विवरण के बीच अंतर कर कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। यदि इन सूचनाओं की पुष्टि होती है तो यह केवल सामान्य तस्करी का मामला नहीं, बल्कि सीमा शुल्क और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है।

96 कैरेट के दस्तावेज, ट्रक में मिलीं 140 कैरेट मछलियां

हाल ही में वीरगंज में मछली लदे एक ट्रक की जांच के दौरान दस्तावेजों और वास्तविक खेप में बड़ा अंतर सामने आया था। भंसार प्रज्ञापनपत्र में 96 कैरेट मछली दर्ज थी, जबकि ट्रक में 140 कैरेट मछलियां मिलीं। यानी 44 कैरेट अतिरिक्त मछली बिना समुचित भंसार प्रक्रिया के नेपाल ले जाने का आरोप सामने आया। पर्सा पुलिस ने आईसीपी सड़क खंड पर कार्रवाई करते हुए ट्रक संख्या प्रदेश 2-03-001 ख 7074 को जब्त किया था। पुलिस ने चालक वीरगंज महानगरपालिका-21 निवासी 23 वर्षीय रवी कुमार साह को गिरफ्तार किया था।

जब्त ट्रक और मछली का कुल मूल्यांकन 32 लाख 11 हजार 392 रुपये किया गया था। डीएसपी चक्रबहादुर मल्ल के अनुसार, जब्त ट्रक, मछली और चालक को आगे की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए वीरगंज भंसार कार्यालय को सौंपा गया था। इस कार्रवाई ने मछली के आयात-निर्यात में दस्तावेजी हेराफेरी और राजस्व चोरी की आशंकाओं को और गंभीर बना दिया है।

सी फिश के कारोबार को लेकर भी उठ रहे सवाल

इस सीमा पर समुद्री मछलियों यानी सी फिश के कारोबार को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। ट्यूना, मैकेरल, पम्फलेट, सार्डिन, सुरमई और झींगा जैसी समुद्री प्रजातियों का कारोबार सामान्य स्थानीय मीठे पानी की मछलियों से अलग आपूर्ति शृंखला और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़ा होता है। ऐसे में इनकी खेप के स्रोत, वास्तविक मात्रा, प्रजाति, खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रमाणपत्र और सीमा शुल्क दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

सूचनाओं के मुताबिक, समुद्री मछलियों की आपूर्ति और सीमा पार कारोबार की आड़ में भी कथित रूप से अनियमितताएं हो रही हैं। हालांकि, इस कारोबार में किन प्रजातियों की कितनी मात्रा और किस माध्यम से आवाजाही हो रही है, इसकी आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

प्रतिबंधित थाई मांगुर की आवाजाही भी चिंता का विषय

मछली कारोबार में प्रतिबंधित प्रजातियों की आवाजाही की आशंका भी गंभीर है। विशेष रूप से थाई मांगुर (अफ्रीकी कैटफिश) के अवैध व्यापार को लेकर निगरानी जरूरी है। भारत में इस मछली के पालन, उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध है। पर्यावरणीय नुकसान और जैव विविधता पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को लेकर इस पर रोक लगाई गई है। ऐसे में यदि इस प्रतिबंधित प्रजाति की सीमा पार आवाजाही हो रही है तो यह संबंधित एजेंसियों के लिए जांच का विषय है।

कई एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद कैसे चल रहा खेल?

रक्सौल पुलिस, एसएसबी, कस्टम और अन्य सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद यदि सीमा पर इस तरह का कारोबार जारी है तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक ओर छोटी-छोटी खेपों को तांगा, ई-रिक्शा, साइकिल और बाइक से सीमा पार पहुंचाने की सूचनाएं हैं, तो दूसरी ओर ट्रक और व्यावसायिक आयात-निर्यात के जरिए दस्तावेजों में कथित हेराफेरी की आशंका सामने आ रही है।

अब जरूरत है कि मछली की खेप के वास्तविक वजन, प्रजाति, कैरेट की संख्या, खरीद-बिक्री के बिल, भंसार प्रज्ञापनपत्र और सीमा शुल्क भुगतान का मिलान कराया जाए। समुद्री मछलियों के स्रोत और परिवहन से जुड़े खाद्य सुरक्षा दस्तावेजों की भी जांच हो। साथ ही प्रतिबंधित प्रजातियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

सीमा पर मछली का कारोबार वैध व्यापार के रूप में जारी रहना चाहिए, लेकिन उसकी आड़ में यदि राजस्व चोरी और प्रतिबंधित मछलियों की तस्करी हो रही है तो यह सरकारी राजस्व के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के लिए भी गंभीर चुनौती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!