
भारत-नेपाल की लाइफलाइन सड़क पर स्ट्रीट लाइट नदारद, बिजली गुल होते ही छा जाता है अंधेरा; कई दीपावली से कायम है समस्या, डिवाइडर पर रोशनी और तिरंगा झालर लगाने की मांग
*नगर परिषद बोर्ड बैठक में लेईडी/सीएफएल बल्ब लगाने की स्वीकृति के बावजूद शहर/बाजार से जुड़े विभिन्न वार्डों में भी अंधेरे का आलम,समुचित रोशनी का प्रबंध नदारद
रक्सौल। (Vor Desk)। दीपावली रोशनी का पर्व है। शहर के बाजारों से लेकर घरों तक रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट की धूम है, लेकिन भारत-नेपाल सीमा के महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर रक्सौल की मुख्य सड़क मेन रोड की तस्वीर इस उत्सवी माहौल से अलग है। शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली इस सड़क पर दीपावली के अवसर पर भी समुचित स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। बाजार की रौनक दुकानों से निकलने वाली रोशनी के भरोसे है। बिजली गुल होते ही मुख्य सड़क अंधेरे में डूब जाती है। धनतेरस जैसे महत्वपूर्ण दिन भी यही स्थिति बनी रही। कई दीपावली से कायम इस समस्या को लेकर शहरवासियों में मायूसी है।

डिवाइडर का सौंदर्यीकरण, लेकिन रोशनी नदारद
करीब चार-पांच वर्ष पहले सड़क और डिवाइडर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पुरानी स्ट्रीट लाइटें हटा दी गई थीं। वर्ष 2022में नगर परिषद का चुनाव हुआ,तब से चार वर्ष बीत गए और अब चुनावी वर्ष शुरू हो गया।लेकिन,स्ट्रीट लाइट और समुचित रौशनी का प्रबंध पूरे शहर में नहीं हो सका।भले ही आज के समय विभागीय बाधा खड़ी हुई,लेकिन,इससे पहले इच्छा शक्ति का आभाव ही बाधा बनी रही। मेन रोड की स्ट्रीट लाइट कहां गई,क्या हुआ,क्या हो रहा है,इसका कोई सार्वजनिक तथ्य नहीं है।इस पर खर्च हुए लाखों रुपये डूब गए।अब इस सड़क पर ओवरब्रिज का प्लान है,उस हिसाब से यह इस मेन रोड के मुख्य हिस्से की अंतिम दीवाली भी साबित हो सकती है,क्योंकि,अब मैत्री पुल से मस्जिद तक ओवरब्रिज ही दिखेगा।हालाकि,इन तथ्यों के बीच भी डिवाइडर का सौंदर्यीकरण लाखों रुपये के खर्च से लगातार जारी रहा और वहां बिजली के पोल भी लगाए गए, लेकिन उन पर रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी। लोगों का सवाल है कि जब डिवाइडर पर पोल मौजूद हैं तो उन पर लाइट लगाकर मुख्य बाजार को रोशन क्यों नहीं किया जा रहा? पुरानी लाइटों का ऑडिट कर मरम्मत कराई जाती तो कम खर्च में भी व्यवस्था बहाल हो सकती थी।

तिरंगा झालर से सज सकता था मुख्य बाजार
दुर्गापूजा के दौरान त्रिलोकी नगर और कोइरियाटोला की पूजा समितियों ने नगर परिषद जन सुविधा केंद्र के आसपास ट्यूब लाइट युक्त तिरंगा झालर लगाई थी। लोगों का सुझाव है कि इसे बाटा चौक तक विस्तार देकर दीपावली से छठ तक मुख्य बाजार को आकर्षक रोशनी से सजाया जा सकता था। सीमा पार नेपाल के वीरगंज में पर्व के दौरान बाजार और सड़कों की जगमगाहट के बीच रक्सौल की स्थिति की तुलना भी हो रही है। मैत्री पुल पार करते ही दोनों शहरों की सजावट और प्रकाश व्यवस्था का अंतर नजर आता है।

व्यापारिक संगठनों ने उठाई आवाज
इंडो नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राज कुमार गुप्ता, मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी संगठन के राजेश केशरीवाल और अंबेडकर ज्ञान मंच के बिट्टू गुप्ता ने मेन रोड में स्ट्रीट लाइट, समुचित प्रकाश प्रबंध और सौंदर्यीकरण की मांग की है। उनका कहना है कि भारत-नेपाल आवागमन और व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण यह सड़क करीब दर्जनभर वार्डों से जुड़ी है। इसी क्षेत्र में नगर परिषद का जन सुविधा केंद्र सह पुराना कार्यालय भी स्थित है। ऐसे में मुख्य सड़क की प्रकाश व्यवस्था प्राथमिकता होनी चाहिए।

नई लाइट लगाने पर विभागीय आदेश की बाधा
कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने बताया कि नगर विकास एवं आवास विभाग के 15 अक्टूबर 2026 के आदेश के कारण फिलहाल नई स्ट्रीट लाइट लगाने की प्रक्रिया प्रभावित है। विभाग ईईएसएल के माध्यम से सोलर और सामान्य स्ट्रीट लाइट की नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है। इसमें सेंसर आधारित केंद्रीयकृत निगरानी प्रणाली का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि, खराब लाइटों की मरम्मत और न्यूनतम आवश्यक रखरखाव का प्रयास किया जाएगा।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)
