Monday, October 19

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक मनोकामना माई मंदिर में महानवमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, खोंइछा भरने और मन्नतें पूरी होने पर बलि चढ़ाने के लिए उमड़े श्रद्धालु

रक्सौल।(Vor desk) ।भारत-नेपाल सीमा के ऐतिहासिक रक्सौल के लक्ष्मीपुर स्थित मनोकामना माई (मनसा माई) मंदिर में शारदीय नवरात्र की महानवमी पर आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। अष्टमी तिथि संपन्न होने के बाद नवमी के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रक्सौल समेत भारत के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान महिलाओं में मां को सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर ‘खोंइछा भरने’ की होड़ मची रही, तो वहीं मनोकामनाएं पूरी होने पर परंपरा के अनुसार बलि चढ़ाने वालों की भी भारी भीड़ देखी गई।

कच्चे ईटों के छोटे से स्थान से शक्तिपीठ बनने तक की अद्भुत कहानी

शताब्दी की पुरानी आस्था और किंवदंतियों समेटे यह मंदिर आज भारत-नेपाल के लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर के इतिहास के जानकारों और पुजारी स्व. जगत ओझा के पुत्र गणेश ओझा के अनुसार, 1960-70 के दशक में यहां देवी का एक अत्यंत छोटा सा स्थान हुआ करता था, जो एक वेदी और मेहराबनुमा संरचना तक ही सीमित था। तब सावन की सप्तमी को हरदिया धांगड़ टोली के लोग यहां पूजा-अर्चना करते थे।

समय के साथ लोगों का विश्वास बढ़ता गया और बाद में कोईरिया टोला निवासी स्व. भंगी महतो ने अपने निजी खर्च से यहां कच्ची ईंटों का एक छोटा मंदिर बनवाया। इसी दौर में एक ऐसी घटना जुड़ी जिसने इस स्थान को दूर-दूर तक प्रसिद्ध कर दिया। वर्ष 1970 के आसपास रक्सौल के विशु सर्राफ को जब लंबे समय तक संतान सुख नहीं मिला, तो उनकी नजर इस कच्चे मंदिर पर पड़ी जहां धांगड़ जाति के लोग पूजा कर रहे थे। उन्होंने मां से मन्नत मांगी कि यदि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तो वे इस मंदिर का भव्य निर्माण कराएंगे। मान्यता है कि मां ने उनकी पुकार सुनी और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिला। इसके बाद उन्होंने विधिवत रूप से इस मंदिर का निर्माण कराया, जिसके बाद से इसे ‘मनोकामना माई मंदिर’ के रूप में ख्याति मिलती चली गई।

मन्नत पूरी होने पर बलि चढ़ाने की है प्राचीन परंपरा

मंदिर की खास विशेषता यह है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि मन्नत पूरी होने के बाद यहां विशेष रूप से बलि चढ़ाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। महानवमी के मौके पर दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नतें पूरी होने पर माता के दरबार में शीश नवाया और विधि-विधान के साथ परंपरा का निर्वहन किया। नवरात्र के इस पावन अवसर पर लगे मेले के कारण पूरा क्षेत्र भक्तिमय और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

शारदीय नवरात्र की महानवमी पर उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। विधि-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए खुद अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) नागमणि कुमार वर्मा, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) मनीष आनंद ,थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक रमेश कुमार महतो सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी और मंदिर कमिटी के सदस्य पूरे समय मंदिर परिसर में कैंप करते रहे। अधिकारियों की सक्रियता और कमिटी के सहयोग से उमड़ी भीड़ के बावजूद पूजा-अर्चना और दर्शन का यह सिलसिला पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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