
रक्सौल।(Vor desk): खुफिया गलियारों में पिछले एक साल से एक सुगबुगाहट थी। नेपाल से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के उस पार से लेकर इस पार तक एक ऐसा काला नेटवर्क सक्रिय था, जिसकी हर चाल पर देश की चाक-चौबंद सुरक्षा एजेंसियां चुपचाप नजर गड़ाए बैठी थीं। आखिरकार, वह घड़ी आ ही गई जब इस साल भर चले ‘साइलेंट गेम’ का परदाफाश हो गया। रक्सौल के कौड़िहार चौक पर पुलिस, एसटीएफ (STF) और राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) की संयुक्त टीम ने एक ऐसा अचूक जाल बिछाया, जिससे अपराधियों के होश उड़ गए।
365 दिनों की खामोश तपस्या और पुख्ता सुराग इस बड़े एक्शन की पटकथा रातों-रात नहीं तैयार हुई थी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) मनीष आनंद के निर्देशन में सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले एक साल से इन संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्यों की एक-एक ईंट जोड़ी थी। कौन कहां से माल लाता है, किसे डिलीवर करता है और इस धंधे का सरगना कौन है—इन तमाम पहेलियों को सुलझाने के लिए एक साल तक लगातार खुफिया सबूत जुटाए गए। जैसे ही शनिवार को यह पक्की खबर हाथ लगी कि कौड़िहार चौक के आसपास संदिग्ध तस्कर किसी बड़ी खेप के साथ मौजूद हैं, वैसे ही संयुक्त टीम ने बिना एक पल गंवाए कार्रवाई को अंजाम दे डाला।
घेराबंदी और एक महिला समेत दो की नाटकीय गिरफ्तारी छापेमारी के इस विशेष अभियान में रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो के साथ सब-इंस्पेक्टर प्रेम कुमार, अंशुली आर्य और अन्य सशस्त्र बलों के जवान पूरी मुस्तैदी से डटे रहे। जैसे ही संयुक्त टीम ने कौड़िहार चौक के इलाके को घेरा, तस्करों को भागने का कोई मौका नहीं मिला। पुलिस ने मौके से एक महिला समेत दो आरोपितों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान उनके पास से करीब पांच किलोग्राम चरस जैसा खतरनाक मादक पदार्थ बरामद किया गया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान रामगढ़वा थाना क्षेत्र के धनहर दिहुली लक्ष्मीपुर गांव निवासी राजेश राम की पत्नी मीरा देवी और रक्सौल के कोइरिया टोला निवासी जयराम साह के पुत्र लक्ष्मण साह के रूप में की गई है।
अब खुलेंगे तस्करी के कई और गहरे राज़ फिलहाल, दोनों गिरफ्तार आरोपितों को सुरक्षित ठिकानों पर रखकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को पूरी उम्मीद है कि इस साल भर की लंबी मेहनत और इस ताज़ा गिरफ्तारी के बाद, भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय इस ड्रग सिंडिकेट की कई और छिपी हुई परतें और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की जड़ों तक पहुंचने के लिए कानूनी शिकंजा कस चुकी हैं।
