
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)। बिहार की सीमावर्ती धरती रक्सौल की सड़कें बुधवार को राजनीतिक पारे के उबाल से तप उठीं। इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के एक इशारे पर सड़कों पर उतरे महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ ऐसा हल्ला बोला कि प्रखंड मुख्यालय का अंबेडकर चौक नारों से थर्रा उठा। पूर्व मंत्री व रक्सौल के पूर्व प्रत्याशी श्याम बिहारी प्रसाद की अगुवाई और सौरंजन कुमार यादव की अध्यक्षता में निकले आक्रोश मार्च ने सीधे तौर पर दिल्ली के शीर्ष सत्ता तंत्र को चुनौती दी। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पुतले फूंककर साफ कर दिया कि लड़ाई अब आर-पार की है।
अंबेडकर चौक पर “झोला भगाओ, लोकतंत्र बचाओ” और “वोट बचाओ, देश बचाओ” के गगनभेदी नारों के बीच नेताओं ने केंद्र और चुनाव आयोग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद ने आक्रामक अंदाज में कहा कि आज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजतांत्रिक अराजकता घोंप दी गई है। उन्होंने सीधा आरोप मढ़ा कि केंद्र के दबाव में संवैधानिक संस्थाओं को मोहरा बनाया जा रहा है, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए गठबंधन का यह संग्राम अब थमने वाला नहीं है।
चुनावी धांधली के गंभीर आरोपों की झड़ी लगाते हुए प्रखंड अध्यक्ष सौरंजन कुमार यादव ने ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल गरीब, दलित और अल्पसंख्यकों के वोट छीनने के लिए किया जा रहा है, जिसे किसी हाल में कबूल नहीं किया जाएगा। वहीं मोतिहारी जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. अखिलेश दयाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब भी चुनाव आयोग से कोई तीखा सवाल पूछा जाता है, तो जवाब देने आयोग नहीं बल्कि भाजपा के प्रवक्ता कूद पड़ते हैं—जनता समझ रही है कि यह ‘रिश्ता क्या कहलाता है’।
विरोध के इस मंच से भाकपा के श्याम बिहारी तिवारी, राजद नेता प्रमोद राय, फखरुद्दीन आलम और सुनील कुशवाहा ने एक सुर में कहा कि देश में जनादेश की चोरी का यह खतरनाक खेल अब बंद होना चाहिए और यह जन-आंदोलन सरकार की मनमानी के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।
प्रदर्शन में राजद, कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा, माकपा और भाकपा-माले के कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम जुटा। मौके पर मदन गुप्ता, नूर मोहम्मद, मनोरंजन तिवारी, नुरुल्लाह खान, अनिल पान, दुर्गेश कुमार, अरमान आलम, संजय यादव, नितेश गुप्ता, सुभाष यादव, रमाशंकर यादव, सुमित कुमार, मृणाल किशोर, नासिर आलम, उमर अंसारी, ओम गुप्ता, संदीप यादव, नवीन यादव, छोटेलाल चौरसिया, सुधन यादव, रवि भारती, अनिल यादव, मोनाक देवान, बिकेश कुमार, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद असलम, शिवपूजन प्रसाद, मनोहर कुमार, देवेंद्र महतो, विजय कुमार, रौनक चंद्रवंशी, सन्नी कुमार, अनिल कुमार दास, मुमताज अहमद, दानिश रशीद और उपेंद्र यादव समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारी आक्रोश के बावजूद पूरा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से सिमटा।
