
वीरगंज।(Vor desk)।नेपाल के नारायणी (गंडक) नदी का सैलाब उतरने के बाद चितवन के नारायणगढ़ स्थित भगवान बुद्ध की मुस्कुराती प्रतिमा एक बार फिर जबरदस्त चर्चा में है। नदी किनारे स्थापित यह प्रतिमा न केवल एक प्रमुख पर्यटकीय आकर्षण है, बल्कि स्थानीय निवासियों और भारतीय सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए जलस्तर को मापने का एक अनौपचारिक ‘सूचक’ भी बन गई है। गंडक बैराज तक पानी पहुंचने से पहले ही इसी प्रतिमा को देखकर भारत में बाढ़ के खतरे और जलस्तर का पैमाना पहले ही पता चल जाता है। यही वजह है कि अब यह प्रतिमा भारतीयों के लिए भी बड़े आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और लोग इसे देखने बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। रक्सौल से 136किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित यह बुद्ध प्रतिमा भरतपुर -नारायणगढ़ क्षेत्र में देवघाट पर स्थित है।
इस विशाल प्रतिमा का निर्माण नारायणगढ़ के सर्राफा व्यवसायी ज्ञानेंद्रमान शाक्य ने वर्ष 2015 में करवाया था। जिस स्थान पर यह प्रतिमा स्थापित है, वहां ब्रिटिश काल में नाव बांधने के लिए एक खंभा बनाया गया था। बाद में वहां बुद्ध की एक छोटी प्रतिमा रखी गई, जो बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती थी। इसके बाद स्थानीय लोगों के अनुरोध पर शाक्य ने इस विशाल प्रतिमा का निर्माण कराया।

ज्ञानेंद्रमान शाक्य के अनुसार, इस प्रतिमा की कुल लंबाई 37 फीट है, जिसमें से 20 फीट हिस्सा जमीन के नीचे गहरा गाड़ा गया है और 16 फिर हिस्सा बाहर दिखाई देता है। यही कारण है कि भीषण से भीषण बाढ़ में आसपास के ढांचे बह जाते हैं, लेकिन बुद्ध की यह मुस्कुराती प्रतिमा अपनी जगह अडिग रहती है।
शाक्य का कहना है कि यदि पानी प्रतिमा के आधार यानी कमल के फूल को छूता है, तो देवघाट स्थित आधिकारिक जल मापन केंद्र में भी खतरे का स्तर पार हो जाता है। इस बार बाढ़ का पानी प्रतिमा के गले तक पहुंच गया था, जिससे उद्योग वाणिज्य संघ के पीछे वाली सड़क जलमग्न हो गई थी। यदि पानी प्रतिमा के सिर तक पहुंचता है, तो पूरा नारायणगढ़ बाजार डूबने का खतरा बन जाता है।
इस प्रतिमा के निर्माण में 1.15 करोड़ रुपये की लागत आई थी। 5 साल पहले आई बाढ़ से हुए नुकसान के बाद 35 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च कर मरम्मत कराई गई और पास में चौतारा बनाया गया। हालांकि, वर्ष 2024 की भीषण बाढ़ में पास में बनी हाथियों की प्रतिमाएं बह गई थीं, लेकिन बुद्ध प्रतिमा आज भी सुरक्षित खड़ी है।यही कारण है कि अब यह देश दुनिया के नजर में चर्चा में छा गई है।बता दे कि रसुवा त्रासदी में भी त्रिशूली नदी की संगम देवघाट स्थित बुद्ध प्रतिमा को छू कर नदी शांत होती गई थी।
लगातार बारिश के बाद नारायणी नदी का जलस्तर घटने लगा, मौसम में सुधार
लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद उफान पर आई नारायणी नदी का जलस्तर अब तेजी से घटने लगा है। पिछले 2 दिनों से मौसम साफ होने और धूप खिलने के कारण नदी के पानी का बहाव कम हो रहा है। रविवार को इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंची नारायणी नदी का जलस्तर सोमवार सुबह से ही नीचे उतरने लगा था।अब स्थिति सामान्य हो गई है।सूत्रों के मुताबिक, बारिश थमने के बाद से नदी की स्थिति में लगातार सुधार देखा जा रहा है।
जल मापन केंद्र देवघाट के अनुसार, रविवार को नारायणी नदी का जलस्तर 11.96 मीटर्स पहुंच गया था, जो सोमवार को घटकर 7.11 मीटर्स पर आ गया है।
उल्लेखनीय है कि नारायणी नदी में 9 मीटर्स से ऊपर के जलस्तर को खतरे का निशान (डेंजर मार्क) माना जाता है, जबकि जलस्तर 7 मीटर्स 30 सेंटीमीटरस पार करने पर सतर्कता (वार्निंग लेबल) बरतने की चेतावनी जारी की जाती है। फिलहाल जलस्तर सतर्कता बिंदु से भी नीचे आ जाने से तटीय इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है।
फोटो/बाढ़ में नारायणी नदी जलधारा में बुद्ध प्रतिमा,सैलाब उतरने के बाद बुद्ध प्रतिमा (रिपोर्ट:पीके गुप्ता)
