
कार्यवाहक सभापति ने बैठक के लिए जारी किया पत्र तो ईओ ने ‘पुलिस जांच’ का हवाला देकर ठुकराई जगह; पूजा-त्योहारों की सफाई, स्ट्रीट लाइट और राजस्व बढ़ाने जैसे बड़े एजेंडे अधर में लटके
विशेष रिपोर्ट | रक्सौल (पूर्वी चंपारण)(vor desk)
सीमावर्ती रक्सौल नगर परिषद में हालिया ‘फाइल कांड’ और ‘सीसीटीवी विवाद’ के बाद शुरू हुई कार्यपालक पदाधिकारी (EO) और कार्यवाहक सभापति के बीच की जंग अब खुलकर प्रशासनिक पत्राचार के मंच पर आ गई है। दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच चल रही वर्चस्व की इस खींचतान का सीधा असर शहर की व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। कार्यवाहक नगर सभापति-सह-उप सभापति पुष्पा देवी द्वारा बुलाई गई सशक्त स्थायी समिति की बैठक के स्थान को ईओ डॉ. मनीष कुमार द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच रस्साकशी चरम पर पहुंच गई है।
मॉडल कक्ष में ही हो बैठक
कार्यवाहक नगर सभापति ने पत्राचार (पत्रांक 132/26, दिनांक 15/09/2026) के जरिए निर्देश जारी किया था कि आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को अपराह्न 12:30 बजे वार्ड संख्या-01 स्थित नगर सरकार भवन के प्रथम तल्ले पर बने कार्यवाहक सभापति के कक्ष में सशक्त स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाए। इसके जवाब में ईओ डॉ. मनीष कुमार ने पत्र भेजकर प्रस्तावित स्थान पर बैठक कराने से साफ इनकार कर दिया। ईओ का तर्क है कि बैठक के लिए चिन्हित कमरा पूर्व में नगर प्रबंधक का कक्ष रहा है और वर्तमान में यह कमरा पुलिस जांच के दायरे में है, इसलिए जांच पूरी होने तक वहां बैठक आयोजित नहीं की जा सकती। ईओ ने बिहार नगरपालिका सशक्त स्थायी समिति कार्य संचालन नियमावली, 2010 की कंडिका 3 का हवाला देते हुए बैठक को मॉडल नक्शे में पूर्व से निर्धारित सभाकक्ष या तय कमरों में ही आयोजित करना श्रेयस्कर बताया है।
कमरे पर विवाद,बैठक के नाम पर घमासान
विवाद के केंद्र में आया यह कमरा वही स्थान है, जहां हाल ही में नगर प्रबंधक के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे को बंद करवाकर अनधिकृत रूप से सरकारी संचिकाएं (फाइलें) देखने का आरोप लगा था। इसी घटनाक्रम के बाद ईओ ने दो कर्मियों को निलंबित किया था और मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी। वर्तमान में हरैया थाना पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और उस कमरे से जुड़े साक्ष्यों को खंगाल रही है। अब ईओ द्वारा इसी पुलिस जांच को आधार बनाकर कार्यवाहक सभापति को उक्त कमरे में बैठक करने से मना किए जाने के बाद नगर प्रबंधक का यह कक्ष प्रशासनिक जंग का नया केंद्र बन गया है।
प्रशासनिक शह मात शुरू
प्रशासनिक शह-मात के इस खेल में रक्सौल शहर के अति-महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े मामले अधर में लटक गए हैं। बुलाई गई इस बैठक में आगामी दशहरा, दीपावली एवं छठ पूजा के अवसर पर विधि-व्यवस्था व ट्रैफिक प्रबंधन, त्योहारों से पूर्व शहर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, प्रमुख सड़कों व छठ घाटों के रास्तों पर समुचित प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) की व्यवस्था करने और नगर परिषद की राजस्व वृद्धि पर विचार जैसे कई बड़े एजेंडों पर निर्णय लिया जाना था, जो अब ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे हैं।
इनकार के पीछे क्या है ईओ का संदेश ?
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि ईओ द्वारा जांच का हवाला देकर जगह बदलने का रुख केवल एक तकनीकी रोक नहीं, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश है कि कानूनी और प्रशासनिक मामलों में नगर परिषद की कमान अधिकारियों के हाथ में ही रहेगी। वहीं दूसरी ओर, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच की इस आपसी तनातनी से जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि शहर की बुनियादी समस्याओं और पूजा-त्योहारों की तैयारियों से ज्यादा प्राथमिकता वर्चस्व की लड़ाई को दी जा रही है। अब देखना यह होगा कि 19 सितंबर को यह बैठक किसी वैकल्पिक स्थान पर हो पाती है या फिर यह विवाद रक्सौल के विकास की रफ्तार को पूरी तरह थाम देगा।
