
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से स्थिति विकराल बनी हुई है। नेपाल प्रहरी के अनुसार बृहस्पतिवार रात तक 389 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें सर्वाधिक 137 शव चितवन और 114 पूर्वी व पश्चिम नवलपरासी से मिले हैं। वहीं, रसुवा में 17, नुवाकोट में 28, धादिंग में 33, गोरखा में 32 तथा तनहुं में 28 शव मिले हैं। सुरक्षाबलों ने 466 घायलों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। नेपाल पर्यटन विभाग के अनुसार 178 भारतीयों सहित 668 पर्यटक लापता हैं, जबकि तिब्बत मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 400 तीर्थयात्री भी संपर्क से बाहर हैं। हालांकि, टिमुरे से 11 भारतीयों समेत 27 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है।
इसी बीच,नेपाल के प्रधान मंत्री बालेंद्र साह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और एक बैठक के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन सहित राहत कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
इधर,आपदा पीछा नहीं छोड़ रही।नेपाल में एक और भीषण तबाही का खतरा मंडरा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार तिब्बत स्थित पुरेपु त्सांगपो नदी व छोचेन खोला के संगम के पास भूस्खलन से कृत्रिम झील बन गई है। बृहस्पतिवार सुबह तक इसमें 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था, जिसके अगले तीन दिनों में 30 लाख घनमीटर और बढ़ने तथा अचानक फूटने की आशंका है। यही पुरेपु त्सांगपो नदी नेपाल के रसुवा में प्रवेश कर भोटेकोशी कहलाती है। इसके अलावा, रसुवागढ़ी सीमा से 18 किमी ऊपर ल्हेन्दे खोला का प्रवाह बाधित होने से 0.11 वर्ग किमी में एक और झील बन गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटेकोशी के निचले और तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है।
भारत ने बढ़ाये मदद के हाथ: संकट की इस घड़ी में भारत ने वायुसेना के दो विशेष विमानों से 47.5 टन राहत सामग्री (टेंट, कंबल, सोलर लैंप, वाटर पंप, जीवनरक्षक दवाएं व खाद्य सामग्री) काठमांडू भेजी है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सामग्री नेपाल सरकार को सौंपी और हर संभव सहयोग का भरोसा जताया।
