
गंडक चौक से मैत्री पुल तक चला बुलडोजर अभियान, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद प्रशासन सख्त; 1,200 से अधिक मकान मालिकों के प्रभावित होने की आशंका
वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल के वीरगंज में त्रिभुवन राजमार्ग अंतर्गत मुख्य सड़क को दोनों ओर 25-25 मीटर चौड़ा करने का बहुचर्चित सड़क विस्तार अभियान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बार फिर तेज हो गया है। सड़क डिवीजन कार्यालय, हेटौंडा और वीरगंज महानगरपालिका की संयुक्त टीम ने मंगलवार को गंडक चौक से भारत-नेपाल मैत्री पुल तक सड़क सीमा के भीतर आने वाले अतिक्रमण को हटाने के लिए सात बुलडोजरों के साथ व्यापक कार्रवाई की। दोपहर करीब 3:30 बजे तक गंडक से मुर्ली क्षेत्र के बीच 70 से अधिक निजी भवनों, दुकानों और अन्य संरचनाओं को ध्वस्त किया जा चुका था।
कार्रवाई के दौरान सड़क सीमा में आने वाले एक संचालित मदरसे से पहले बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके बाद भवन का अतिक्रमित हिस्सा तोड़ दिया गया। इसी अभियान में वीरगंज के चर्चित भाटभटेनी मॉल के मुख्य प्रवेश द्वार को भी बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा वीरगंज महानगर के पूर्व मेयर विजय सरावगी की इमारत के सड़क सीमा में आने वाले हिस्से को भी तोड़ा गया।
सड़क डिवीजन कार्यालय के इंजीनियर एवं वीरगंज के फोकल पर्सन दुर्गा प्रसाद ने बताया कि अभियान के लिए कुल सात बुलडोजर लगाए गए हैं। इनमें से एक बुलडोजर उच्च अदालत क्षेत्र में तथा शेष छह मुर्ली इलाके में तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल सड़क सीमा के भीतर आने वाले करीब आधा दर्जन सरकारी भवनों को नहीं छुआ गया है।
यह सड़क विस्तार अभियान पिछले शुक्रवार को शुरू हुआ था। कृषि औजार कारखाना क्षेत्र तक अतिक्रमण हटाने के बाद बहुअरी इलाके में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी थी। इसके बाद सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान दोबारा शुरू किया गया, जिसे मंगलवार को और अधिक गति दी गई।
करीब तीन दशक से विवादों में रही इस परियोजना को मार्च 2026 में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय से कानूनी मंजूरी मिली थी। अदालत ने सड़क विस्तार के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने अभियान को आगे बढ़ाया। नेपाल सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026/27 में इस औद्योगिक कॉरिडोर सड़क विस्तार परियोजना के लिए 1 अरब 2 करोड़ 25 लाख नेपाली रुपये का बजट स्वीकृत किया है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना की टेंडर प्रक्रिया आगामी सावन (जुलाई-अगस्त) तक पूरी करने की तैयारी है।
अभियान की निगरानी के लिए भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के अधिकारी शुभराज न्यौपाने सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वीरगंज में कैंप कर रहे हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है तथा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
दूसरी ओर, ‘वीरगंज बचाओ संघर्ष समिति’ के संयोजक जवाहर प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में प्रभावित लोग सड़क विस्तार अभियान का लगातार विरोध कर रहे हैं। समिति का आरोप है कि बिना उचित मुआवजे, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को बेदखल किया जा रहा है। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से 1,200 से अधिक मकान मालिकों के साथ हजारों छोटे-बड़े व्यापारी प्रभावित होंगे। समिति का कहना है कि शहर में पहले से वैकल्पिक बाइपास सड़कें मौजूद हैं, इसलिए मुख्य व्यापारिक मार्ग को इस तरह उजाड़ना आवश्यक नहीं था।
वहीं, वीरगंज महानगरपालिका और सड़क डिवीजन कार्यालय का कहना है कि शहर को आधुनिक, व्यवस्थित और ट्रैफिक जाम से मुक्त बनाने के लिए मुख्य सड़क का चौड़ीकरण अनिवार्य है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुरू किया गया यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
