Tuesday, July 7

वीरगंज में फिर गूंजा ‘500 रुपये सीमा नियम’ का विरोध, राष्ट्रीय एकता दल ने कहा- गरीबों पर सख्ती, बड़े कारोबारियों को छूट क्यों?

घंटाघर चौक पर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी, सीमा पर हो रही सख्ती, किसानों की खाद संकट और कथित भेदभाव के मुद्दे उठाए
वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल-भारत सीमा पर व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं के लिए लागू 500 रुपये की सीमा (भंसार) व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। हाल ही में इस व्यवस्था को लेकर सीमा क्षेत्र में बढ़ते असंतोष के बीच मंगलवार को राष्ट्रीय एकता दल, वीरगंज ने शहर के घंटाघर स्थित मुख्य चौक पर विरोध प्रदर्शन कर सरकार से इस नियम को तत्काल समाप्त करने की मांग की।
रवींद्र यादव और अकलेश कुशवाहा के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, किसानों और सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी तथा गरीबों और किसानों के समर्थन में लिखे बैनर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे तथा सीमा नीति के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सीमा पर लागू 500 रुपये के नियम के कारण सबसे अधिक परेशानी गरीब परिवारों, मजदूरों और सीमावर्ती इलाकों के लोगों को हो रही है। उनका आरोप था कि हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों को सोना और शराब जैसी वस्तुओं पर छूट मिलती है, जबकि रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेकर आने वाले आम लोगों के साथ जांच के नाम पर दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने इस व्यवस्था को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सीमावर्ती किसानों की समस्याएं भी प्रमुखता से उठाई गईं। प्रदर्शनकारियों ने किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने, उनके श्रम का सम्मान करने, नेपाल-भारत सीमा पर कथित अन्याय और दुर्व्यवहार रोकने तथा सीमांत क्षेत्र के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की। कार्यक्रम का संयोजन दल के युवा नेता लालबाबू राम ने किया।
प्रदर्शन के बाद आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए ओमबाबू यादव, अकलेश कुशवाहा और रवींद्र यादव ने सरकार पर सीमा क्षेत्र के लोगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि बड़े व्यापारी और संगठित तस्कर तो व्यवस्था का लाभ उठा लेते हैं, जबकि अपनी दैनिक जरूरतों का सामान लाने वाले गरीब नागरिकों को 500 रुपये के नियम के नाम पर परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह नीति सीमावर्ती आबादी के साथ अन्याय है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सीमा क्षेत्र की समस्याओं, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता और 500 रुपये के सीमा नियम पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो राष्ट्रीय एकता दल आंदोलन को और व्यापक रूप देगा।
गौरतलब है कि नेपाल-भारत सीमा पर लागू 500 रुपये की व्यक्तिगत सामान सीमा को लेकर पिछले कुछ समय से व्यापारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और सीमावर्ती नागरिकों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। विभिन्न संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था से सीमावर्ती क्षेत्रों की पारंपरिक आवाजाही और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है, जबकि सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य अवैध आयात और राजस्व चोरी पर नियंत्रण करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!