
वीरगंज। (Vor desk)। करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद वीरगंज के मुख्य सड़क क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण अभियान एक बार फिर तेज हो गया है। त्रिभुवन राजपथ के अंतर्गत आने वाले मेन रोड क्षेत्र में सड़क सीमा के भीतर बने अतिक्रमित ढांचों को हटाने के लिए शुक्रवार से सड़क विभाग ने पुनः बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
सड़क विभाग ने इसी वर्ष अप्रैल में वीरगंज के मेन रोड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए सड़क की निर्धारित सीमा के भीतर आने वाले भवनों और अन्य संरचनाओं के हिस्सों को आंशिक रूप से ध्वस्त किया था। उस समय प्रभावित भू-स्वामियों और मकान मालिकों को 25 दिनों के भीतर स्वयं शेष अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों द्वारा निर्धारित अवधि में संरचनाएं नहीं हटाए जाने के बाद विभाग ने दोबारा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।
सड़क डिभिजन कार्यालय, हेटौंडा के प्रमुख किरण कार्की ने बताया कि शुक्रवार से गंडक चौक क्षेत्र से सड़क सीमा के भीतर बची हुई संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई पुनः प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग ने जून 2026 में भी सार्वजनिक सूचना जारी कर संबंधित मकान मालिकों को पांच दिनों के भीतर सड़क क्षेत्र में आने वाले निर्माण स्वयं हटाने का निर्देश दिया था। चेतावनी दी गई थी कि ऐसा नहीं होने पर सड़क ऐन, 2031 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कार्की के अनुसार, रक्सौल-वीरगंज मैत्री पुल से बहुअरी गंडक चौक तक त्रिभुवन राजपथ के दोनों ओर केंद्र बिंदु से 25-25 मीटर क्षेत्र को सड़क सीमा मानते हुए संरक्षण और चौड़ीकरण का कार्य अप्रैल से शुरू किया गया था। बावजूद इसके, कई प्रभावित भवनों को नहीं हटाए जाने के कारण विभाग को पुनः बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में सड़क विभाग ने गंडक चौक से मैत्री पुल तक के मेन रोड क्षेत्र में लगभग 1,200 मकानों और भवनों पर आंशिक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। इसके बाद कुछ भवन स्वामियों ने स्वयं अपने प्रभावित हिस्सों को हटा लिया था, लेकिन घंटाघर, माइस्थान, आदर्शनगर और अलखियामठ चौक क्षेत्र में बड़ी संख्या में संरचनाएं अब भी यथावत बनी हुई हैं।
इस बीच, सड़क चौड़ीकरण अभियान के विरोध में प्रभावित मकान मालिकों और व्यापारियों का आंदोलन लगातार जारी है। उनका कहना है कि वीरगंज की मुख्य सड़क को त्रिभुवन राजपथ की श्रेणी से अलग कर शहरी मार्ग घोषित किया जाना चाहिए, जिससे शहर की संरचना, व्यापारिक गतिविधियों और यातायात व्यवस्था के अनुरूप विकास योजना तैयार की जा सके।
‘वीरगंज बचाओ संघर्ष समिति’ के संयोजक जवाहर प्रसाद गुप्ता तथा ‘वीरगंज युवा तथा व्यापारी सड़क पीड़ित संघर्ष समिति’ के संयोजक कुंदन रौनियार सहित आंदोलनरत पक्षों का दावा है कि मुख्य सड़क का स्वरूप अब राष्ट्रीय राजमार्ग की अपेक्षा शहरी मार्ग का हो चुका है। इसलिए सड़क विस्तार को 25-25 मीटर के बजाय सीमित दायरे में किया जाना चाहिए।
इसी मांग को लेकर गुरुवार को पर्सा-1 के सांसद हरि पंत, वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के पदाधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों ने काठमांडू में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने मेन रोड को शहरी मार्ग घोषित करने और सड़क चौड़ीकरण को दोनों ओर 15-15 मीटर तक सीमित रखने की मांग रखी थी।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल की इस पहल के अगले ही दिन सड़क विभाग द्वारा पुनः बुलडोजर कार्रवाई शुरू किए जाने से प्रभावित क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। शुक्रवार को वीरगंज के पिपरा क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ, जिसके बाद दोपहर बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
सड़क विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई सर्वोच्च अदालत के आदेश और प्रचलित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है तथा सड़क सीमा संरक्षण और चौड़ीकरण का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
