Wednesday, July 1

वीरगंज में भारतीय युवती का रेस्क्यू: प्रेम जाल, बंधक और सीमा पार मानव तस्करी के एंगल की जांच में जुटी नेपाल पुलिस

मोतिहारी की युवती को वीरगंज में दो महीने से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखने का आरोप, पिता की एक कॉल बनी बेटी की जिंदगी की उम्मीद

रक्सौल/वीरगंज।(VOR desk)। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में मानव तस्करी और प्रेमजाल के मामलों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेपाल के पर्सा जिला पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वीरगंज महानगरपालिका क्षेत्र से बिहार की एक 25 वर्षीय युवती को सकुशल मुक्त कराया है, जिसे कथित तौर पर प्रेम संबंध के बहाने नेपाल लाकर कई महीनों से बंधक बनाकर रखा गया था। हालांकि, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी पुलिस की कार्रवाई से पहले ही फरार हो गया, जिसकी गिरफ्तारी के लिए नेपाल पुलिस ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम संबंध, धोखे से नेपाल ले जाने और जबरन बंधक बनाकर रखने के आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। वहीं, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना के तार सीमा पार मानव तस्करी के किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।

मोतिहारी की युवती को वीरगंज में बनाया गया था बंधक

पर्सा जिला पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता एवं डीएसपी हरि बहादुर बस्नेत ने बताया कि रेस्क्यू की गई युवती की पहचान बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया क्षेत्र निवासी 25 वर्षीय निमुत कुमारी के रूप में हुई है। आरोप है कि बिहार के ही छपरा जिले के निवासी 25 वर्षीय चंदन कुमार ने उसे गत 2 अप्रैल से वीरगंज महानगरपालिका-24 स्थित रमगढ़वा क्षेत्र में जबरन बंधक बनाकर रखा हुआ था।सूचना के मुताबिक,उसे जनकपुर ले जाने के बाद वीरगंज लाया गया,ताकि किसी को शक नहीं हो।

पुलिस के अनुसार, युवती को लंबे समय से एक घर में कैद जैसी परिस्थितियों में रखा गया था और उसे बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।

पिता को फोन कर सुनाई आपबीती

मामले में नया मोड़ तब आया, जब किसी तरह युवती ने मोबाइल फोन के माध्यम से अपने पिता धर्मेंद्र कुमार शर्मा से संपर्क स्थापित किया। युवती ने अपने पिता को बताया कि उसे जबरन बंधक बनाकर रखा गया है और वह गंभीर संकट में है।

बेटी की गुहार सुनने के बाद पिता ने तत्काल नेपाल की सामाजिक संस्था ‘आफन्त नेपाल’, स्थानीय नागरिकों तथा नेपाल पुलिस के इलाका पुलिस पोस्ट रानीघाट को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई।

तड़के तीन बजे पुलिस ने मारा छापा

प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस सहायक निरीक्षक रामकुमार थिंग के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संस्था ‘आफन्त नेपाल’ और ‘स्वच्छ रक्सौल’ संस्था के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाया।

इसके बाद 29 जून की सुबह करीब तीन बजे वीरगंज महानगरपालिका-24 के रमगढ़वा स्थित एक संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी की गई। पुलिस ने मौके से युवती को सकुशल मुक्त करा लिया। हालांकि, मुख्य आरोपी चंदन कुमार पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार होने में सफल रहा।

सुरक्षित संरक्षण में भेजी गई युवती

पुलिस ने बताया कि रेस्क्यू के बाद सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए युवती को सामाजिक संस्था ‘आफन्त नेपाल’ के संरक्षण में सौंप दिया गया है, जहां वह फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है। पुलिस के अनुसार, जिस स्थान से युवती को मुक्त कराया गया, वह इलाका पुलिस पोस्ट रानीघाट से लगभग एक किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।

प्रेमजाल या मानव तस्करी? कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस

इस पूरे मामले ने भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ते अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि यह मामला केवल प्रेम संबंध में विवाद और अवैध बंधक बनाने का है या इसके पीछे सीमा पार मानव तस्करी का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

जांच एजेंसियां आरोपी और युवती के बीच संबंधों, नेपाल आने के कारणों तथा दोनों के संपर्क में रहे अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी

डीएसपी हरि बहादुर बस्नेत ने बताया कि मुख्य आरोपी चंदन कुमार की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी, अपहरण, जबरन बंधक बनाना और महिलाओं के विरुद्ध अपराध जैसे मामलों में शामिल किसी भी आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि खुली भारत-नेपाल सीमा का फायदा उठाकर प्रेमजाल, मानव तस्करी, अवैध बंधक बनाने और महिला अपराधों के मामलों में वृद्धि हुई है। ऐसे मामलों में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

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